पश्चिम बंगाल की राजनीति से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। 21 मई को दक्षिण 24 परगना जिले की फलता (Falta) विधानसभा सीट पर री-पोलिंग होने से पहले, तृणूमल कांग्रेस (TMC) उम्मीदवार जहांगीर खान ने अपना नाम वापस ले लिया है। खास बात ये भी है कि जहांगीर ने चुनाव प्रचार के अंतिम दिन ये घोषणा की है।
हाल ही में सम्पन्न हुए पश्चिम बंगाल चुनावों के दौरान वो काफी सुर्खियों में आए थे। फलता सीट पर उनके सामने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के देबांशु पांडा, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया-मार्क्सिस्ट (CPI-M) के शंभू कुर्मी और कांग्रेस के अब्दुर रज्जाक मोल्ला की चुनौती थी। जहांगीर द्वारा अपना नाम वापस लेने के बाद भी, 21 मई को पुनर्मतदान तो जरूर होगा।
दूसरी ओर प्रदेश के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने आज देबांशु पांडा के समर्थन में एक रोड-शो किया। उन्होंने एक मंदिर में पूजा और आरती करने के बाद रोड-शो शुरू किया। इस दौरान बड़ी संख्या में जमा हुए BJP समर्थकों के बीच जय श्री राम के नारे गूंज रहे थे। इससे पहले, उन्होंने एक रैली में तंज कसते हुए कहा कि क्या लोगों को पता है कि पुष्पा (जहांगीर) कहां गायब हो गया है?
इन चुनावों में TMC की हार के बाद पार्टी का मनोबल बुरी तरह से टूटा हुआ माना जा रहा है। यही कारण है कि TMC के वरिष्ठ नेतृत्व अथवा स्वयं जहांगीर ने भी अपने समर्थन में रोड-शो, जनसभा आदि नहीं की। फलता विधानसभा क्षेत्र डायमंड हार्बर लोकसभा सीट के अंतर्गत आता है, जहां से TMC के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी सांसद हैं। उन्होंने भी अपने कैंडिडेट के समर्थन में कोई रैली आयोजित नहीं की।
अपना नाम लेने के बाद जहांगीर ने कहा, "मेरा उद्देश्य फलता में शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करना और इसका अधिकतम संभव विकास करना है। मेरा विजन 'सोनार फलता' था। हमारे मुख्यमंत्री फलता के लोगों के लिए एक विशेष पैकेज दे रहे हैं। ठीक इसी कारण से मैं अपना नामांकन वापस ले रहा हूँ। मैंने फलता के विकास और शांति के हित में अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली है।" जानकारी के लिए बता दें कि इलेक्शन वाले दिन, फलता के एक पोलिंग स्टेशन का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें EVM में BJP वाला बटन टेप से ब्लॉक्ड पाया गया था। 21 मई को री-पोलिंग के बाद 24 मई को नतीजे भी सबके सामने आ जाएंगे।
TMC ने भी X पर एक पोस्ट में अपना स्पष्टीकरण जारी किया है। उन्होंने लिखा, "फलता में दोबारा होने वाले चुनाव से हटने का जहांगीर खान का फैसला उनका निजी फैसला है, पार्टी का नहीं। 4 मई को चुनाव नतीजे घोषित होने के बाद से, अकेले फलता विधानसभा क्षेत्र में ही हमारी पार्टी के 100 से ज्यादा कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया जा चुका है। दिन-दहाड़े डरा-धमकाकर पार्टी के कई दफ्तरों में तोड़फोड़ की गई, उन्हें बंद कर दिया गया और उन पर जबरन कब्जा कर लिया गया। इसके बावजूद बार-बार शिकायतें मिलने पर भी चुनाव आयोग (EC) ने इस पर आँखें मूंदे रखीं।"
TMC ने आगे लिखा, "इतने दबाव के बावजूद, हमारे कार्यकर्ता चट्टान की तरह अडिग हैं और एजेंसियों तथा प्रशासन के जरिए BJP द्वारा फैलाए जा रहे डर का लगातार विरोध कर रहे हैं। हालांकि, कुछ लोग आखिरकार इस दबाव के आगे झुक गए और उन्होंने चुनावी मैदान से पीछे हटने का फैसला कर लिया। हम इसकी कड़ी निंदा करते हैं। 'बांग्ला विरोधी' BJP के खिलाफ हमारी लड़ाई जारी रहेगी, फिर चाहे वह पश्चिम बंगाल में हो या दिल्ली में।"