G7 समिट: वैश्विक मंच पर प्रधानमंत्री मोदी का बड़ा संदेश, कहा संवाद और सहयोग से ही शांति संभव

इस समिट के मौके पर प्रधानमंत्री मोदी ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन ज़ायद अल नाहयान, इजिप्ट के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी, केन्या के राष्ट्रपति विलियम रूटो और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग से भी मुलाकात की। कल प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 16 महीनों में पहली मुलाकात भी हुई।

G7 समिट: वैश्विक मंच पर प्रधानमंत्री मोदी का बड़ा संदेश, कहा संवाद और सहयोग से ही शांति संभव

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया पर G7 लीडर्स के साथ एक फोटो भी की साझा।

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Highlights

  • सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जॉर्जिया मेलोनी की बातचीत एक बार फिर वायरल हो गई।
  • प्रधानमंत्री ने एक वर्किंग सेशन के दौरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में भारतीय नागरिकों की मौत का मुद्दा भी उठाया।
  • G7 देशों ने कई इंडो-पैसिफिक, यूक्रेन और मिडिल ईस्ट जैसे जियो-पॉलिटिकल मुद्दों पर बयान भी जारी किए।

फ्रांस के एवियन शहर में 15 से 17 जून तक 52वीं G7 समिट आयोजित की जा रही है। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के निमंत्रण पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इसमें हिस्सा लेने पहुंचे हैं। वहां पहुंचने के बाद प्रधानमंत्री मोदी G7 के लीडर्स से मिले, जिनमें इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी, यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची समेत अन्य नेता भी शामिल थे। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी और मेलोनी की बातचीत एक बार फिर वायरल हो गई। हालांकि बातचीत की आवाज साफ नहीं आई, लेकिन ऐसा लगा कि प्रधानमंत्री मोदी ने मेलोनी से सोशल मीडिया पर उनकी लोकप्रियता का जिक्र किया। इस पर इटली की प्रधानमंत्री ने कहा, "हां, हम इंस्टाग्राम पर सबसे मशहूर कपल हैं।"

इस समिट के मौके पर प्रधानमंत्री मोदी ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन ज़ायद अल नाहयान, इजिप्ट के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी, केन्या के राष्ट्रपति विलियम रूटो और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग से भी मुलाकात की। कल प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 16 महीनों में पहली मुलाकात भी हुई। इस मुलाकात की शुरुआत हैंडशेक के साथ हुई। प्रधानमंत्री ने फोर्जिंग न्यू पार्टनरशिप्स एंड रीबिल्डिंग इंटरनेशनल सॉलिडेरिटी" विषय पर आयोजित एक वर्किंग सेशन में हिस्सा लिया और विस्तार से अपने विचार भी प्रकट किए। इसमें उन्होंने वैश्विक स्तर पर चल रहे तनावों का भी जिक्र किया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "अंतरराष्ट्रीय साझेदारियाँ और वैश्विक एकजुटता तभी सार्थक बन सकती हैं, जब हम साझा चुनौतियों का मिलकर समाधान करें।"

उन्होंने आगे कहा, "भारत का दृढ विश्वास है कि विश्व के विभिन्न हिस्सों में चल रहे तनावों और युद्धों का स्थायी समाधान डायलॉग, डिप्लोमेसी और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के मार्ग से ही संभव है। हम वेस्ट एशिया में शांति प्रयासों में हुई प्रगति का स्वागत करते हैं। इस संघर्ष से वेस्ट एशिया में हमारे मित्र देशों को जान-माल का नुकसान झेलना पड़ा है। होर्मुज स्ट्रेट में मेरीटाइम ट्रेड में आई बाधा के कारण पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा। भारत के कई सिविलियन्स को जान गंवानी पड़ी। ग्लोबल मेरीटाइम ट्रेड के माध्यम से सभी देशों को आपस में जोड़ने वाले नाविकों की सुरक्षा हमारा दायित्व है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि समुद्री मार्ग सुरक्षित रहें और सीफेयरर्स बिना भय के अपना कार्य कर सकें।"

G7 देशों ने कई जियो-पॉलिटिकल मुद्दों पर अपने बयान भी जारी किए। इनमें इंडो-पैसिफिक, यूक्रेन और मिडिल ईस्ट जैसे विषय शामिल थे। इंडो-पैसिफिक के मुद्दे पर उन्होंने कहा, "हम कानून के शासन पर आधारित एक स्वतंत्र और खुले इंडो-पैसिफिक के महत्व पर जोर देते हैं। हम पूर्वी और दक्षिण चीन सागर और ताइवान स्ट्रेट में यथास्थिति को बदलने की किसी भी एकतरफा कोशिश का विरोध करते हैं, खासकर बल या दबाव के जरिए। ऐसे मुद्दों को केवल बातचीत के जरिए शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाया जाना चाहिए। हम उत्तर कोरिया के परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रमों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हैं और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों के अनुसार उत्तर कोरिया के पूर्ण परमाणु निरस्त्रीकरण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हैं।

उन्होंने आगे कहा, "हम उत्तर कोरिया से अपहरण के मुद्दे को तुरंत सुलझाने का आग्रह करते हैं। हम उत्तर कोरिया द्वारा क्रिप्टोकरेंसी की चोरी और साइबर अपराधों से मिलकर निपटने की आवश्यकता को दोहराते हैं। हम चीन की भागीदारी के साथ 11 जून 2026 को राष्ट्रपति मैक्रों द्वारा आयोजित 'ग्लोबल कन्वर्जेंस फॉर ग्रोथ समिट' का स्वागत करते हैं। हम बड़े और लगातार बने हुए वैश्विक असंतुलन के कारणों और उनसे निपटने की आवश्यकता पर अन्य बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के साथ मिलकर काम करने में अपनी साझा रुचि की पुष्टि करते हैं। हम अमेरिका की अध्यक्षता वाले वर्ष में G20 और अन्य संबंधित मंचों के भीतर इन प्रयासों को जारी रखेंगे।"

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