महाराष्ट्र, बिहार, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश की कुल 28 विधान परिषद सीटों पर चुनाव संपन्न हो चुके हैं और परिणाम भी घोषित कर दिए गए हैं। अगर बात महाराष्ट्र की करें, तो यहाँ की 5 सीटों में से भारतीय जनता पार्टी (BJP) वाले महायुति (MY) गठबंधन को 2 सीटें मिली हैं, जबकि महा विकास अघाड़ी (MVA) ने 3 सीटों पर जीत दर्ज की है।
महा विकास अघाड़ी की ओर से छत्रपति संभाजीनगर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से एनसीपी-शरदचंद्र पवार (NCP-SP) के प्रतापसिंह पाटिल और पुणे स्नातक क्षेत्र से इसी पार्टी की हर्षदा देशमुख जाधव विजयी रहीं। इसके अलावा, नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस के अभिजीत वंजारी ने भी शानदार जीत हासिल की है। इसके अलावा पुणे शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा के कौस्तुभ गावड़े और अमरावती शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से शिवसेना (SS) के उम्मीदवार किरण सरनाईक ने जीत हासिल की है।
दूसरी तरफ, बिहार की 8 सीटों में से BJP ने 3, जनता दल-यूनाइटेड (JD-U) ने 1, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने 1 और प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी (JSP) ने 1 सीट पर कब्जा जमाया, जबकि 2 सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने बाजी मारी। उम्मीदवारों की बात करें तो कोसी स्नातक सीट से BJP के नरेंद्र कुमार यादव और दरभंगा स्नातक सीट से पार्टी के ही सर्वेश कुमार विजयी रहे।
पटना स्नातक सीट पर JD-U के नीरज कुमार ने जीत का परचम लहराया। वहीं, तिरहुत स्नातक सीट से निर्दलीय उम्मीदवार बंशीधर ब्रजवासी और तिरहुत शिक्षक सीट से BJP के नरेंद्र प्रसाद सिंह ने जीत हासिल की। इसके अलावा, पटना शिक्षक सीट से RJD के डॉ. संजीव कुमार, दरभंगा शिक्षक सीट से JSP के सुरेश प्रसाद राय और सारण शिक्षक सीट से निर्दलीय राहुल राज विजयी घोषित किए गए।
कर्नाटक में सत्ताधारी कांग्रेस का पूरी तरह सूपड़ा साफ हो गया और पार्टी यहाँ खाता खोलने में भी नाकाम रही। राज्य की सभी सीटों पर नेशनल डेमोक्रेटिक अलायन्स (NDA) गठबंधन का दबदबा रहा, जिसमें BJP को 4 और उसकी सहयोगी जनता दल-सेक्युलर (JD-S) को 1 सीट पर सफलता मिली।
विजेताओं की बात करें तो BJP के एस.वी. संकानूर (पश्चिम स्नातक), के.एम. सुरेश (दक्षिण-पूर्व स्नातक) और शशील जी. नमोशी (उत्तर-पूर्व शिक्षक) अपनी सीटें बचाने और जीतने में कामयाब रहे। वहीं, बेंगलुरु शिक्षक सीट पर बड़ा उलटफेर देखने को मिला, जहाँ JD-S के ए.पी. रंगनाथ ने कांग्रेस के दिग्गज नेता पुट्टन्ना को करारी शिकस्त दी।
उत्तर प्रदेश की 11 विधान परिषद सीटों पर हुए चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) और समाजवादी पार्टी (SP) के बीच टक्कर देखने को मिली। स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की बात करें, तो मेरठ से दिनेश कुमार गोयल (BJP) और आगरा से मानवेंद्र प्रताप सिंह (BJP) ने अपनी जीत बरकरार रखी। वहीं, इलाहाबाद-झांसी से मान सिंह यादव (SP), लखनऊ से कांति सिंह (SP) और वाराणसी स्नातक सीट से आशुतोष सिन्हा (SP) विजयी रहे।
दूसरी ओर, शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में BJP का दबदबा रहा, जहाँ लखनऊ से उमेश द्विवेदी, मेरठ से श्रीचंद शर्मा, बरेली-मुरादाबाद से हरि सिंह ढिल्लों और गोरखपुर-फैजाबाद सीट से ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने जीत दर्ज की। वहीं, वाराणसी शिक्षक सीट से लालबिहारी यादव (SP) और आगरा शिक्षक सीट से आकाश अग्रवाल (SP) ने विजय हासिल की।
इन चुनावी परिणामों के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों की ओर से तीखी प्रतिक्रियाएं और बयान सामने आ रहे हैं। जहाँ एक तरफ भारतीय जनता पार्टी (BJP) का कहना है कि बैलट पेपर से चुनाव होने के बावजूद जनता ने विपक्ष को पूरी तरह नकार दिया है, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों ने पलटवार करते हुए कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्वाचन क्षेत्र वाराणसी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के मुख्यालय वाले नागपुर जैसे मजबूत गढ़ों में BJP की पराजय हुई है।
MLC चुनाव के नतीजों पर कांग्रेस सांसद मल्लू रवि ने कहा कि नागपुर, जो RSS का मुख्यालय है, वहां से एक कांग्रेस उम्मीदवार MLC चुना गया है। वहीं, उत्तर प्रदेश में प्रधानमंत्री की संसदीय सीट से जुड़े निर्वाचन क्षेत्र से SP ने MLC की एक सीट जीती है। ये दोनों नतीजे BJP और मोदी सरकार के खिलाफ एक उल्टे रुझान की ओर इशारा करते हैं।
BJP का दावा है कि उसने ज्यादा सीटें जीती हैं, लेकिन इनमें से ज्यादातर सीटें पहले से ही उसी के पास थीं, जिन्हें उसने बरकरार रखा है। इससे पता चलता है कि देश की जनता अगले चुनावों में सरकार बदलने के बारे में सोच रही है। राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस गठबंधन सत्ता में आएगा और राहुल गांधी निश्चित रूप से भारत के प्रधानमंत्री बनेंगे।
वहीं मध्य प्रदेश के मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि कांग्रेस छाती पीट-पीटकर दावा कर रही थी कि EVM में गड़बड़ी है और उनका जोर इस बात पर था कि अगर चुनाव बैलेट पेपर से कराए जाएं, तो वे जीत जाएंगे। खैर, MLC चुनाव बैलेट पेपर से ही कराए गए और कांग्रेस कहीं नजर ही नहीं आई। वे केवल एक सीट जीत पाए। एक बार फिर, पूरे देश में BJP का दबदबा कायम हो गया है।