मुरली मनोहर जोशी के बयान से गरमाई सियासत, कहा, भारत पहले विश्वगुरु था, आज नहीं

जो नहीं जानते, उन्हें बता दें कि डॉ. मुरली मनोहर जोशी BJP के संस्थापक सदस्यों में से एक हैं। वे 1991 से लेकर 1993 तक पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रह चुके हैं। वो अलग-अलग सीटों से कई बार लोकसभा के सदस्य भी रह चुके हैं।

मुरली मनोहर जोशी के बयान से गरमाई सियासत, कहा, भारत पहले विश्वगुरु था, आज नहीं

इस दिग्गज नेता की इस बयान को लोगों द्वारा अलग-अलग चश्मों से देखा जा रहा है।

Share:

Highlights

  • डॉ. जोशी ने कहा की यदि युवा संस्कृत सीखें, तो यह भारत के साथ-साथ विश्व के लिए भी बहुत लाभदायक होगा।
  • भारत विश्वगुरु नहीं है, इस लाइन को लेकर विपक्षी दल एक्टिव हो गया।
  • कांग्रेस ने इसे केवल एक टिप्पणी नहीं, बल्कि सरकार को दिखाया गया आईना बताया।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सबसे वरिष्ठ नेताओं में से एक डॉ. मुरली मनोहर जोशी इस समय काफी चर्चा में है। नई दिल्ली में संस्कृत भारती के केंद्रीय ऑफिस के उद्घाटन के दौरान उन्होंने कहा, ''हमें विश्वगुरु होना चाहिए और हम अतीत में रहे भी हैं। अगर आज हम विश्वगुरु नहीं हैं, तो यह कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन इस दृष्टि से संस्कृत बहुत महत्वपूर्ण है। यहां तक ​​कि नासा के लोग भी बार-बार कहते हैं कि संस्कृत संचार के लिए सबसे महत्वपूर्ण भाषाओं में से एक है। देश के युवाओं को संस्कृत सीखनी चाहिए और संस्कृत साहित्य पढ़ना चाहिए। कई विद्वानों, वैज्ञानिकों ने संस्कृत का अध्ययन किया है। यदि युवा संस्कृत सीखें तो यह देश के साथ-साथ विश्व के लिए भी बहुत लाभदायक होगा। यदि देश में अधिकांश काम संस्कृत में किए जाएं तो यह राष्ट्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी। यहां तक ​​कि डॉ. अंबेडकर ने भी संस्कृत को राष्ट्र की राष्ट्रीय भाषा बनाने के प्रयास किए थे।"

बस फिर क्या था। "भारत विश्वगुरु नहीं है", इस लाइन को लेकर विपक्ष एक्टिव हो गया। उत्तर प्रदेश कांग्रेस द्वारा X पर एक पोस्ट किया गया जिसमें लिखा था कि, "आईना अपनों ने दिखाया है, विश्वगुरु का चश्मा उतारने का वक्त आया है! मुरली मनोहर जोशी के इस कड़वे सच ने आज की दिखावे वाली राजनीति के गुब्बारे की हवा निकाल दी है। जब घर के बुजुर्ग और पार्टी के मार्गदर्शक ही आईना दिखाने लगें, तो समझ लीजिए कि 'सब चंगा है' का नारा सिर्फ कागजों तक सीमित है। जोशी जी का यह बयान उस 'आत्ममुग्धता' पर सीधा प्रहार है जहाँ हम अपनी कमियों को सुधारने के बजाय इतिहास की गौरवगाथाओं के पीछे छिपकर आज की बदहाली को नजरअंदाज कर रहे हैं। यह महज एक टिप्पणी नहीं, बल्कि अपनी ही सरकार को आईना दिखाने का साहस है कि बिना ठोस धरातल और वर्तमान की उपलब्धियों के विश्वगुरु का ढोल पीटना केवल एक खोखला जुमला बनकर रह जाएगा।

जो नहीं जानते, उन्हें बता दें कि डॉ. मुरली मनोहर जोशी BJP के संस्थापक सदस्यों में से एक हैं। वे 1991 से लेकर 1993 तक पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रह चुके हैं। वो अलग-अलग सीटों से कई बार लोकसभा के सदस्य भी रह चुके हैं। डॉ. जोशी 1977 से 1980 तक अल्मोड़ा, 1996 से 2004 तक अलाहाबाद, 2009 से 2014 तक वाराणसी और 2014 से 2019 तक कानपुर सीट से लोकसभा सांसद रहे हैं। इसके अतिरिक्त वो 1992 से 1996 तक उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सांसद भी रहे हैं। इतना ही नहीं, डॉ. जोशी केंद्र सरकार में गृहमंत्री, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री और मानव संसाधन विकास मंत्री भी रह चुके हैं। अब ऐसे दिग्गज नेता के इस बयान को लोगों द्वारा अलग-अलग चश्मों से देखा जा रहा है। कोई इसे केंद्र सरकार की आलोचना बता रहा है, तो कोई इसे उनकी व्यक्तिगत राय बता रहा है।

रिलेटेड टॉपिक्स