पंजाब कांग्रेस की नई कमेटियों का एलान, चन्नी को मिली बड़ी जिम्मेदारी, चर्चा में मनीष तिवारी की अनदेखी

पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में किए गए 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद, दुनिया के सामने भारत का पक्ष रखने के लिए सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल बनाए गए थे। मनीष तिवारी ऐसे ही एक प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थे। अगर उनके कद का कोई नेता कांग्रेस छोड़कर किसी दूसरी पार्टी में शामिल होता है, तो यह उस पार्टी के लिए फायदेमंद और कांग्रेस के लिए बहुत नुकसानदेह साबित हो सकता है।

पंजाब कांग्रेस की नई कमेटियों का एलान, चन्नी को मिली बड़ी जिम्मेदारी, चर्चा में मनीष तिवारी की अनदेखी

मनीष तिवारी 2024 से चंडीगढ़ से लोकसभा सांसद है।

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Highlights

  • सोशल मीडिया पर मनीष तिवारी की एक क्रिप्टिक (रहस्यमयी) पोस्ट ने भी कई अटकलों को जन्म दे दिया है।
  • विजय इंदर सिंगला को चुनाव प्रबंधन और समन्वय कमेटी का चेयरमैन नियुक्त किया गया है।
  • अमरिंदर सिंह राजा वडिंग PPCC अध्यक्ष और प्रताप सिंह बाजवा पंजाब में कांग्रेस विधायक दल के नेता बने रहेंगे।

पंजाब में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। इसे ध्यान में रखते हुए, पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PPCC) के अंदर चुनाव से जुड़ी कमेटियों के चेयरमैन नियुक्त किए गए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. चरणजीत सिंह चन्नी को चुनाव प्रचार कमेटी का चेयरमैन बनाया गया है, जबकि विजय इंदर सिंगला को चुनाव प्रबंधन और समन्वय कमेटी का चेयरमैन नियुक्त किया गया है।

वहीं, सुखजिंदर सिंह रंधावा को कोर कमेटी का चेयरमैन और डॉ. अमर सिंह को मैनिफेस्टो कमेटी का चेयरमैन बनाया गया है। इसके अलावा, अमरिंदर सिंह राजा वडिंग PPCC अध्यक्ष और प्रताप सिंह बाजवा पंजाब में कांग्रेस विधायक दल के नेता बने रहेंगे। हालांकि एक प्रमुख नेता, मनीष तिवारी, को इनमें से किसी भी कमेटी में शामिल न किए जाने से कांग्रेस पार्टी को झटका लग सकता है।

सोशल मीडिया पर मनीष तिवारी की एक क्रिप्टिक पोस्ट ने भी काफी अटकलों को जन्म दिया है। उन्होंने लिखा, "है बड़ा कोई अवगुण उसमें, जिसे कोई हुनर आवे। काश, मेरे पास लोगों की असुरक्षाओं का कोई इलाज होता!" उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस पार्टी ने उन्हें पिछले 45 वर्षों में बहुत कुछ दिया है और बदले में उन्होंने भी पार्टी की सेवा में अपने जीवन के कई दशक समर्पित किए हैं।

मनीष ने इसके आगे "Que sera sera, Whatever will be, will be" भी जोड़ा, जिसका अर्थ है कि जो होना तय है, वह होकर ही रहेगा। बता दें कि मनीष तिवारी 2024 से चंडीगढ़ से लोकसभा सांसद हैं। इससे पहले वो 2009 से 2014 तक लुधियाना एवं 2019 से 2024 तक आनंदपुर साहिब से भी सांसद रह चुके हैं। उन्होंने केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय में राज्य मंत्री के तौर भी काम किया है।

मनीष तिवारी ने 1998 से 2003 तक इंडियन यूथ कांग्रेस (IYC) और 1986 से 1993 तक नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) के अध्यक्ष के तौर पर काम किया है। उन्हें एक ऐसे नेता के तौर पर जाना जाता है जिनकी सोच आजाद है और जो बेबाकी से अपनी बात रखते हैं। अक्सर देखा गया है कि कुछ मुद्दों पर उनकी राय कांग्रेस पार्टी से अलग होती है।

पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में किए गए 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद, दुनिया के सामने भारत का पक्ष रखने के लिए सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल बनाए गए थे मनीष तिवारी ऐसे ही एक प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थे। अगर उनके कद का कोई नेता कांग्रेस छोड़कर किसी दूसरी पार्टी में शामिल होता है, तो यह उस पार्टी के लिए फायदेमंद और कांग्रेस के लिए बहुत नुकसानदेह साबित हो सकता है।

PPCC में हाल ही में हुई दूसरी नियुक्तियों को देखें तो सुखविंदर सिंह डैनी, राज कुमार वेरका और संगत सिंह गिलजियां को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है। सुखपाल सिंह खैरा, राणा गुरजीत सिंह और डॉ. धर्मवीर गांधी को चुनाव प्रचार कमेटी का सह-अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।

चुनाव प्रबंधन और समन्वय कमेटी के सह-अध्यक्षों में ओ.पी. सोनी, रजिया सुल्ताना, कुलजीत सिंह नागरा, अंगद सिंह सैनी और भारत भूषण आशु शामिल हैं। वहीं मैनिफेस्टो कमेटी के सह-अध्यक्षों में गुरजीत सिंह औजला, परगट सिंह, हरदयाल सिंह कंबोज और सुखबिंदर सिंह सरकारिया शामिल हैं।​

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