प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज नई दिल्ली के भारत मंडपम में यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (UPSC) के शताब्दी समारोह में हिस्सा लिया। उनके साथ केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह, प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. प्रमोद कुमार मिश्र, UPSC के चेयरपर्सन व पूर्व रक्षा सचिव डॉ. अजय कुमार और कैबिनेट सचिव डॉ. टी.वी. सोमनाथन भी मौजूद थे। प्रधानमंत्री मोदी ने इस कार्यक्रम को संबोधित भी किया। उन्होंने दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट में कल हुई घटना का जिक्र किया।
उन्होंने कहा कि इस घटना के दौरान भारत के कैप्टन स्मित ने धैर्य, सूझ-बूझ और साहस का परिचय दिया। आज इजराइल के प्रधानमंत्री ने भी कहा कि एक भारतीय ने 9/11 जैसी त्रासदी को होने से रोका। कैप्टन स्मित की बहादुरी हर भारतीय को गौरव से भर देती है। मैंने आज उनके पिता भूपेंद्र भाई, उनकी माँ गीता बहन और उनकी पत्नी सोनल से भी बात की। अभी उनका इलाज चल रहा है और पूरी दुनिया को उन पर गर्व है। प्रधानमंत्री ने कहा कि हम सभी स्मित के उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की प्रार्थना करें और भारत का गौरव बढ़ाने वाले स्मित का अभिनंदन करें।
प्रधानमंत्री के अनुसार, आज का दिन न केवल UPSC के 100 साल पूरे होने का उत्सव है, बल्कि इसकी विरासत का भी उत्सव है। यह उस आकांक्षा का उत्सव है जिसे हर साल लाखों युवा संजोते हैं। यह उस विश्वास का उत्सव है जो हर भारतीय को इस संस्था पर है। इस 100 साल के सफर में पीढ़ियाँ बदलीं, सरकारें बदलीं, टेक्नोलॉजी में बदलाव आया और सिलेबस बदले। फिर भी UPSC पर भरोसा पहले जैसा ही अटूट बना हुआ है। इस 100 साल की यात्रा की याद में एक डाक टिकट और एक सिक्का जारी किया गया है।
100 अहम केस लॉ का एक संकलन भी लॉन्च किया गया है। मैं इस 100 साल के सफर से जुड़े सभी खास लोगों का सम्मान करता हूँ और आप सभी को शुभकामनाएँ देता हूँ। इस ऐतिहासिक अवसर पर, उन्होंने सरदार वल्लभभाई पटेल को भी नमन किया। आजादी के बाद, पटेल के सामने न केवल देश को आजाद बनाए रखने की चुनौती थी, बल्कि एक राष्ट्र को चलाने की चुनौती भी थी। राष्ट्र के पुनर्निर्माण के लिए जिस स्टील फ्रेम की आवश्यकता थी, उसे सरदार वल्लभभाई पटेल ने प्रदान किया।
उन्होंने इस संस्था को स्वतंत्र भारत का एक प्रमुख स्तंभ बनाया और इसे मजबूत किया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पिछले कुछ दशकों में UPSC ने अपनी जिम्मेदारियां बहुत अच्छे ढंग से निभाई हैं। हमने इस बारे में मंच से भी विस्तार से बात की है। इसलिए, मैं न तो इसे दोहराना चाहता हूँ और न ही इसकी डिटेल में जाना चाहता हूँ। इतिहास से आगे बढ़कर, अब भारत का भविष्य हमारा इंतजार कर रहा है। विकसित भारत के लिए देश को जिस तरह के गवर्नेंस की जरूरत है, उसे UPSC और राज्य लोक सेवा आयोग जैसे संस्थान काफी हद तक संभव बनाएंगे।
आज आप जिन युवाओं को भर्ती कर रहे हैं, वे विकसित भारत के निर्माण में अहम भूमिका निभाएंगे। वे उस विकसित भारत से सबसे ज्यादा फायदा उठाने वालों में भी शामिल होंगे। 2047 का भारत आज के भारत से बहुत अलग होगा। आज की तुलना में भारत ज्यादा अर्बन (शहरी) होगा। गाँवों और शहरों के बीच का फासला कम होगा। हमारे नागरिकों, खासकर युवाओं की उम्मीदें और आकांक्षाएँ बहुत ज्यादा होंगी। हम आज ही इस बदलाव को होते हुए देख सकते हैं।
उन्होंने आगे कहा कि जब AI कुछ ही पलों में हजारों दस्तावेजों को प्रोसेस कर सकता है और सरकार के पास रियल-टाइम डेटा उपलब्ध है, तो नागरिक तेजी से समाधान चाहते हैं। सोच में आ रहे इस बदलाव के कारण हमारी सिविल सेवाओं में भी नए बदलावों की जरूरत है। इसलिए, हमें भविष्य की जरूरतों के हिसाब से अपने चयन के मापदंडों और भर्ती प्रक्रियाओं को ढालना होगा। हमने अतीत में एक ऐसा दौर देखा है जब यह माना जाता था कि सरकार ही माईबाप है। लेकिन आज हम ऐसे दौर में हैं जहां हमारा मंत्र है "नागरिक देवो भव", देश का हर नागरिक हमारे लिए देवता के समान है।
नागरिकों की सेवा करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। राष्ट्रीय और राज्य, दोनों स्तरों पर हमें इसी भावना के अनुरूप अपनी चयन प्रक्रियाएँ तैयार करनी चाहिए। प्रो-पीपल, प्रोएक्टिव और गुड गवर्नेंस के पैमानों के आधार पर, हमें देश को ऐसे प्रोफेशनल्स देने होंगे जिनमें गरीबों की कठिनाइयों को समझने की संवेदनशीलता हो।