पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष पर राज्यसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संबोधन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ज्यादातर पश्चिम एशियाई देशों के राष्ट्राध्यक्षों से बात कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य डायलॉग और डिप्लोमेसी के जरिए इस क्षेत्र में शांति बहाल करना है। प्रधानमंत्री मोदी ने तनाव कम करने और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने पर भी चर्चा की है। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में, सरकार ने हर क्षेत्र में दूसरे देशों पर निर्भरता कम करने के लिए लगातार प्रयास किए हैं।

पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष पर राज्यसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संबोधन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज राज्यसभा में मौजूदा संघर्ष पर संबोधन दिया।

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Highlights

  • भारत सभी गल्फ देशों के साथ इजराइल, ईरान और अमेरिका के भी सम्पर्क में है।
  • भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए 27 देशों की बजाए 41 देशों से आयात करता है।
  • भारत सरकार ने मेड इन इंडिया जहाज बनाने के लिए 70 हजार करोड़ रूपए का बजट आवंटित किया है।

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज राज्यसभा में पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष पर सम्बोधन दिया। इससे पूर्व प्रधानमंत्री मोदी लोकसभा में भी अपनी बात विस्तार से रख चुके हैं, जहां उन्होंने मौजूदा स्थिति और उससे निपटने के लिए उठाये गए कदमों के बारे में सदन को अवगत कराया। अपने सम्बोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वेस्ट एशिया में युद्ध शुरू हुए 3 हफ्ते से ज्यादा हो गए हैं। इस युद्ध की वजह से दुनिया में ऊर्जा का गंभीर संकट पैदा हो गया है। भारत के लिए भी यह स्थिति चिंताजनक है। इस युद्ध ने हमारे व्यापारिक मार्गों पर असर डाला है। इसके चलते पेट्रोल, डीजल, गैस और फर्टिलाइजर्स की नियमित आपूर्ति प्रभावित हुई है। प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसी गंभीर स्थिति में, यह अत्यंत आवश्यक है कि भारत के उच्च सदन से एक स्वर में शांति और संवाद का संदेश पूरे विश्व तक पहुंचे।

उन्होंने बताया कि, "युद्ध की शुरुआत से ही, मैंने फोन पर दो राउंड्स में ज्यादातर पश्चिम एशियाई देशों के राष्ट्राध्यक्षों से बात की है। हम सभी गल्फ देशों के साथ-साथ ईरान, इजरायल और अमेरिका के भी लगातार संपर्क में हैं। हमारा लक्ष्य डायलॉग और डिप्लोमेसी के जरिए इस क्षेत्र में शांति बहाल करना है। हमने तनाव कम करने और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने पर भी चर्चा की है। इस युद्ध में, किसी की भी जान को खतरा होना मानवता के हित में नहीं है। इसलिए, भारत का लगातार यही प्रयास है कि सभी पक्षों को जल्द से जल्द किसी शांतिपूर्ण समाधान तक पहुंचने के लिए प्रोत्साहित किया जाए। संकट की स्थितियों में, चाहे वह देश के भीतर हो या विदेश में, भारतीयों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। युद्ध शुरू होने के बाद से, 3 लाख 72 हजार से अधिक भारतीय सुरक्षित रूप से भारत लौट चुके हैं। अकेले ईरान से ही, अब तक एक हजार से अधिक भारतीय सुरक्षित वापस आ चुके हैं।"

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "हमारी सरकार इस संकट के दौरान पूरी संवेदनशीलता के साथ काम कर रही है। सभी देशों ने वहां मौजूद भारतीयों की सुरक्षा का आश्वासन दिया है। हालांकि, यह बहुत दुख की बात है कि हमलों के कारण कुछ भारतीयों की जान चली गई है और कुछ घायल भी हुए हैं। ऐसे कठिन समय में, प्रभावित परिवारों को आवश्यक सहायता प्रदान की जा रही है। घायलों को सर्वोत्तम संभव उपचार सुनिश्चित किया जा रहा है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वैश्विक व्यापार के सबसे बड़े मार्गों में से एक है। इस क्षेत्र से कच्चे तेल, गैस और फर्टिलाइजर्स से जुड़ा बड़ा ट्रांसपोर्ट होता है। हमारा प्रयास यह सुनिश्चित करना है कि तेल और गैस की आपूर्ति जहां से भी संभव हो, भारत तक पहुंचे। देश इन प्रयासों के परिणाम देख रहा है। पिछले कुछ दिनों में, कई देशों से कच्चे तेल और LPG लेकर जहाज भारत पहुंचे हैं। इस दिशा में हमारे प्रयास आने वाले दिनों में भी जारी रहेंगे।"

उन्होंने बताया, "कोई भी संकट हमारे साहस और हमारे प्रयासों, दोनों की परीक्षा लेता है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि देश ऐसी चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना कर सके, पिछले 11 वर्षों में लगातार निर्णय लिए गए हैं। ऊर्जा आयातों का डायवर्सिफिकेशन इन्हीं प्रयासों का एक हिस्सा है। पहले कच्चे तेल, LNG और LPG जैसी ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए 27 देशों से आयात किया जाता था। आज भारत 41 देशों से ऊर्जा का आयात करता है। हमारी सरकार यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रही है कि हम ईंधन के किसी एक ही स्रोत पर अत्यधिक निर्भर न रहें। सरकार घरेलू गैस आपूर्ति में LPG के साथ-साथ PNG पर भी ध्यान केंद्रित कर रही है। पिछले एक दशक में, देश में PNG कनेक्शन के क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य किया गया है। हाल के दिनों में, इस कार्य में और भी तेजी लाई गई है।"

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में, सरकार ने हर क्षेत्र में दूसरे देशों पर निर्भरता कम करने के लिए लगातार प्रयास किए हैं। उदाहरण के लिए, भारत का 90% से ज्यादा व्यापार विदेशी जहाजों से होता है। यह स्थिति किसी भी वैश्विक संकट के दौरान भारत की स्थिति को और खराब कर देती है। इसलिए सरकार ने मेड इन इंडिया जहाज बनाने के लिए लगभग 70 हजार करोड़ रूपए का बजट आवंटित किया है। मौजूदा संकट ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं को हिलाकर रख दिया है। पश्चिम एशिया में अब तक हुए नुकसान से उबरने में दुनिया को काफी लंबा समय लगेगा। यह सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं कि भारत पर इसका कम से कम असर पड़े।

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