SCO में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फोकस, सुरक्षा, कनेक्टिविटी और युवाओं के लिए नए अवसर

प्रधानमंत्री मोदी के अनुसार, शांत और सुरक्षित यूरेशिया की हमारी साझा आकांक्षा, अफगानिस्तान में शांति और स्थिरता से भी जुड़ी है। भारत अफगानिस्तान के लोगों के विकास और मानवीय सहायता में योगदान देता रहा है और आगे भी देता रहेगा। आज की इंटरकनेक्टेड दुनिया में सुरक्षा की परिधि और भी व्यापक हो चुकी है। पश्चिम एशिया के संकट ने यह दिखाया है कि किसी एक क्षेत्र का संघर्ष वहीं तक सीमित नहीं रहता। उसका प्रभाव पूरे विश्व की एनर्जी सिक्योरिटी, मेरीटाइम ट्रेड और सप्लाई चेन्स पर पड़ता है।

SCO में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फोकस, सुरक्षा, कनेक्टिविटी और युवाओं के लिए नए अवसर

प्रधानमंत्री मोदी ने हेड्स ऑफ स्टेट काउंसिल की बैठक को संबोधित किया।

Share:

Highlights

  • जो देश आतंकियों को पनाह देते है, उन्हें संदेश देना होगा की आतंकवाद किसी के लिए स्ट्रेटेजिक एसेट नहीं हो सकता।
  • भारत अफगानिस्तान के लोगों के विकास और मानवीय सहायता के लिए अपना सहयोग जारी रखेगा।
  • भारत में SCO सिविलाइजेशनल डायलॉग फोरम का पहला सेशन इस साल आयोजित होगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित 26वें शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन को संबोधित किया। 'हेड्स ऑफ स्टेट' काउंसिल की बैठक को संबोधित करते हुए, उन्होंने कहा कि SCO की 25वीं वर्षगांठ के इस विशेष अवसर पर आप सबके बीच उपस्थित होना मेरे लिए अत्यंत हर्ष का विषय है। बिश्केक में हमारे भव्य स्वागत और आतिथ्य के लिए मैं राष्ट्रपति जापारोव का हार्दिक अभिनंदन करता हूँ। 

कल किर्गिस्तान के स्वतंत्रता दिवस के दिन हमें यहाँ उपस्थित रहने का सौभाग्य मिला। मैं राष्ट्रपति जी और यहां के लोगों को एक बार फिर हार्दिक बधाई देता हूं। आज उज्बेकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस पर मैं राष्ट्रपति जी और उज्बेकिस्तान के लोगों को भी बहुत-बहुत बधाई देता हूं। वर्ल्ड नोमेड गेम्स की शानदार ओपनिंग सेरेमनी के दौरान हम सभी को किर्गिस्तान की समृद्ध संस्कृति और हमारी साझा विरासत की झलक दिखी। यही साझा विरासत और आपसी जुड़ाव SCO परिवार की एक बड़ी शक्ति है।

पिछले 25 वर्षों में SCO ने यूरेशिया के विशाल भूभाग में संवाद और सहयोग की एक मजबूत परंपरा विकसित की है। हमने मिलकर अपने लोगों की भलाई के साथ-साथ मानवता के विकास में भी बहुमूल्य योगदान दिया है। इन 25 वर्षों में हमने सहयोग की मजबूत नींव तैयार की है। अब आने वाले 25 वर्षों में हमारा लक्ष्य इस सहयोग को स्पष्ट परिणामों में बदलने का होना चाहिए। आज जब विश्व अनिश्चितता और अस्थिरता से गुजर रहा है, हमें अपने साझा भूगोल को साझा अवसरों में बदलना है और हमारे प्रयासों से हमारे लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने आगे बताया कि, "पिछली बैठक में मैंने शंघाई सहयोग संगठन (SCO) को लेकर भारत की सोच के तीन मुख्य स्तंभों का उल्लेख किया था: 

S - Security
C - Connectivity
O - Opportunity"

अब समय है कि इन तीनों स्तंभों को विजन से आगे बढ़ाकर ठोस आउटकम्स तक ले जाया जाए। इसकी पहली आवश्यकता है - शांति और सुरक्षा। आतंकवाद आज भी पूरी मानवता के लिए गंभीर चुनौती बना हुआ है। इसके विरुद्ध लड़ाई में हम एक्शन-रिएक्शन की सोच तक सीमित नहीं रह सकते। हमें आतंकवाद के फाइनेंसिंग, रिक्रूटमेंट, रेडिकलाइजेशन और सेफ हेवंस के पूरे इकोसिस्टम को ध्वस्त करना होगा। हमें एक स्वर में बोलना होगा कि इस गंभीर विषय पर दोहरे मापदंड के लिए कोई स्थान नहीं हो सकता। जो देश आतंकवाद को अपनी नीति का साधन बनाते हैं, आतंकियों को पनाह और समर्थन देते हैं, उन्हें कड़ा संदेश देना होगा कि आतंकवाद किसी के लिए स्ट्रेटेजिक एसेट नहीं हो सकता। 

शांत और सुरक्षित यूरेशिया की हमारी साझा आकांक्षा, अफगानिस्तान में शांति और स्थिरता से भी जुड़ी है। भारत अफगानिस्तान के लोगों के विकास और मानवीय सहायता में योगदान देता रहा है और आगे भी देता रहेगा। आज की इंटरकनेक्टेड दुनिया में सुरक्षा की परिधि और भी व्यापक हो चुकी है। पश्चिम एशिया के संकट ने यह दिखाया है कि किसी एक क्षेत्र का संघर्ष वहीं तक सीमित नहीं रहता। उसका प्रभाव पूरे विश्व की एनर्जी सिक्योरिटी, मेरीटाइम ट्रेड और सप्लाई चेन्स पर पड़ता है। इसका सबसे अधिक खामियाजा ग्लोबल साउथ के देशों को भुगतना पड़ता है। 

इसलिए भारत का आह्वान रहा है कि सभी तनावों और युद्धों का समाधान बैटलफील्ड पर नहीं, डायलॉग और डिप्लोमेसी से ही संभव है। ड्रग ट्रैफिकिंग, केवल एक अपराध नहीं है बल्कि हमारी युवा पीढ़ी और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है। SCO के अंतर्गत सिक्योरिटी थ्रेट्स, ऑर्गेनाइज्ड क्राइम, इन्फॉर्मेशन सिक्योरिटी और नारकोटिक्स जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए स्थापित किए जा रहे सेंटर्स एक सकारात्मक कदम है। हमें इन्हें प्रैक्टिकल कोऑर्डिनेशन और टाइमली एक्शन का प्रभावी माध्यम बनाना चाहिए। 

प्रधानमंत्री मोदी ने आगे बताया कि हमारे साझा विकास का दूसरा आधार है, मजबूत और विश्वसनीय कनेक्टिविटी। भारत उन सभी प्रयासों का समर्थन करता है, जो मार्केट्स को जोड़ते हैं, व्यापार को सुगम बनाते हैं और विकास के नए रास्ते खोलते हैं। किन्तु इन प्रयासों में सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान भी अत्यंत आवश्यक है। यही SCO चार्टर की भी मूल भावना है। आने वाले समय में कनेक्टिविटी का स्वरूप और व्यापक होगा।

रोड्स, रेलवे और एयर कॉरिडोर्स के साथ-साथ हमें कस्टम्स प्रोसेसेस को सरल बनाना होगा, डिजिटल डॉक्यूमेंटेशन को बढ़ावा देना होगा, लॉजिस्टिक्स नेटवर्क्स को अधिक एफिशिएंट बनाना होगा। उन्होंने आगे बताया कि तीसरा स्तंभ है ऑपोर्चुनिटी। इसका अर्थ है कि SCO के सहयोग का लाभ सीधे हमारे लोगों तक पहुँचे। हमारी सबसे बड़ी पूंजी हमारे लोगों के बीच आपसी संबंध हैं। भारत के लिए SCO महान सभ्यताओं, संस्कृतियों और विचारों का संगम है। SCO के अगले 25 वर्षों में पीपल-टू-पीपल टाईस को हमारे सहयोग के केन्द्र में रखना चाहिए।

हमारी सफलता की वास्तविक कसौटी यह होनी चाहिए कि, हमारे प्रयासों से युवाओं को कितने नए अवसर मिले, हमारे आंत्रप्रेन्योर्स के लिए कितने नए बाजार खुले, हमारे किसानों को टेक्नोलॉजी का कितना लाभ मिला और हमारे नागरिकों का जीवन कितना बेहतर हुआ। यही “सिक्योरिटी, कनेक्टिविटी और ऑपोर्चुनिटी का वास्तविक अर्थ है। SCO में हमारा सहयोग केवल गवर्नमेंट ड्रिवन नहीं, बल्कि पीपल ड्रिवन होना चाहिए। मुझे खुशी है कि किर्गिस्तान की अध्यक्षता के अंतर्गत SCO में यूथ इंगेजमेंट पर विशेष बल दिया गया है।

भारत ने SCO में स्टार्टअप फोरम, यंग ऑथर्स कॉन्क्लेव और यंग साइंटिस्ट्स फोरम जैसे इनिशिएटिव्स लिए हैं। पिछले वर्ष भारत ने SCO सिविलाइजेशनल डायलॉग फोरम का प्रस्ताव रखा था। मुझे प्रसन्नता है कि इसका पहला सेशन इस वर्ष भारत में आयोजित होगा। उन्होंने विश्वास जताया कि सभी की सक्रिय भागीदारी से यह फोरम SCO में जीवंत संवाद का सशक्त मंच बनेगा।

रिलेटेड टॉपिक्स
Most Popular