भारतीय बॉक्स ऑफिस पर हाल ही में एक अनोखा चमत्कार हुआ है, जिसने पूरी फिल्म इंडस्ट्री और दर्शकों को चौंका दिया है। हम बात कर रहे हैं फिल्म 'हनुमान अंश' की। महज 2 करोड़ रूपए के छोटे बजट में बनी इस फिल्म ने अब तक 42 करोड़ रूपए से अधिक कमा लिए हैं और सिनेमाघरों में यह अभी भी चल रही है। यह फिल्म सफलता की एक ऐसी कहानी लिख रही है, जिसकी शुरू में किसी न उम्मीद भी नहीं की होगी।
7 अगस्त को रिलीज हुई इस फिल्म ने अपने पहले दिन केवल 10 लाख रूपए का कलेक्शन किया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, रिलीज के शुरूआती दो हफ्तों में इसने मुश्किल से 1.48 करोड़ रूपए की कमाई की थी। ऐसा लग रहा था कि फिल्म जल्द ही सिनेमाघरों से हट जाएगी, लेकिन जल्द ही हालात बदल गए।
फिल्म ने तीसरे हफ्ते से रफ्तार पकड़नी शुरू की। चौथे रविवार को इसने 12 करोड़ रूपए से ज्यादा का कलेक्शन किया। यह फिल्म भारतीय हिन्दू संत नीम करौली बाबा, जिन्हें नीब करौरी बाबा के नाम से भी जाना जाता है पर आधारित है, जिन्हें भक्त 'महाराज-जी' कहकर पूजते हैं। शोभिनव सत्य ने मुख्य भूमिका निभाई है, जबकि विशाल चतुर्वेदी ने फिल्म का निर्देशन किया है।
कलाकारों की टीम में चंदन के. आनंद, अनिल रस्तोगी और पूर्णिमा तिवारी जैसे कलाकार शामिल हैं। फिल्म बिना किसी हाइप के, सिर्फ लोगों की जुबानी तारीफों या वर्ड ऑफ माउथ के दम पर सुपरहिट हो गई है। उम्मीद है कि ये फिल्म जल्द ही 50 करोड़ रूपए का आंकड़ा भी पर कर लेगी।
बॉक्स ऑफिस की तरह इस फिल्म की मार्केटिंग की कहानी भी बेहद दिलचस्प है। खबरों के अनुसार, बजट की कमी के कारण मेकर्स पारंपरिक और बड़े कैंपेन नहीं कर सके। इसके बजाय, उन्होंने आठ 'भंडारे' आयोजित किए, जो फिल्म के प्रमोशन का मुख्य जरिया बने। इतना ही नहीं, फिल्म के निर्माण और प्रमोशन में गहरी आध्यात्मिकता देखी गई। टीम ने रिलीज से पहले श्री प्रेमानंद जी महाराज से मार्गदर्शन लिया। सेट पर सख्त नियम थे, जिनमें शाकाहारी भोजन और शराब पर प्रतिबंध शामिल था।
जहां कन्नड़ सुपरस्टार यश की फिल्म 'टॉक्सिक' 500 से 1,000 करोड़ के भारी-भरकम बजट के बावजूद बॉक्स-ऑफिस पर कोई खास असर नहीं दिखा पा रही है, वहीं हनुमान अंश लगातार सुपरहिट बनने की ओर बढ़ रही है। फिलहाल ये फिल्म हमें यह सिखाती है कि सिनेमाघरों में सफलता पाने के लिए फिल्म का बहुत बड़ी ओपनिंग के साथ शुरू होना जरूरी नहीं है। कभी-कभी, सही दर्शकों का समर्थन और उनकी चर्चा ही फिल्म को सफल बना देती है।