नितिन नबीन के निमंत्रण पर भारत पहुंचे रवि लामिछाने, भारत-नेपाल संवाद को मिल सकती है एक नई दिशा

इस दौरे से कुछ दिन पहले, नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने वहां की संसद में एक विवादित बयान दिया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि "प्रधानमंत्री बनने के बाद मुझे पता चला कि न केवल भारत ने नेपाल की जमीन पर कब्जा किया है, बल्कि नेपाल ने भी कई जगहों पर भारत की जमीन पर कब्जा किया है। इस मामले को सुलझाने के लिए, दोनों देशों का इरादा दोस्तों की तरह बैठकर बातचीत करने का है।"

नितिन नबीन के निमंत्रण पर भारत पहुंचे रवि लामिछाने, भारत-नेपाल संवाद को मिल सकती है एक नई दिशा

आज रवि लामिछाने भाजपा मुख्यालय पहुंचे, जहां राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने उनका स्वागत किया।

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Highlights

  • रवि लामिछाने के साथ RSP के विपिन कुमार आचार्य, दीपक बोहरा और प्रदीप आचार्य भी भारत आए है।
  • उनकी प्रधानमंत्री मोदी, विदेश मंत्री डॉ. जयशंकर और NSA अजीत डोभाल के साथ उच्च-स्तरीय बैठकें भी हो सकती है।
  • रवि लामिछाने नेपाल लौटने से पहले, भारत में नेपाली समुदाय से बातचीत और अयोध्या का दौरा भी करेंगे।

नेपाल की राजनीति से बड़ी खबर सामने आई है। सत्तारूढ़ राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) के अध्यक्ष, नेपाल के पूर्व उपप्रधानमंत्री और पूर्व गृहमंत्री रवि लामिछाने, भारतीय जनता पार्टी (BJP) के अध्यक्ष नितिन नबीन के निमंत्रण पर 1-5 जून तक भारत की यात्रा पर हैं। इस दौरान, वे नई दिल्ली में उच्च-स्तरीय राजनीतिक और कूटनीतिक बैठकें करेंगे, जिसमें BJP नेतृत्व के साथ चर्चा भी शामिल है।

इस यात्रा में भारत में रहने वाले नेपाली समुदाय के साथ बातचीत और अयोध्या की निजी यात्रा भी शामिल होगी। उनके साथ पार्टी नेताओं और सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल भी शामिल हैं। रवि लामिछाने के साथ RSP के संयुक्त महासचिव विपिन कुमार आचार्य, दीपक बोहरा, निकिता पौडेल और प्रदीप आचार्य भी भारत आए हैं।

आज रवि लामिछाने BJP मुख्यालय पहुंचे, जहां नितिन नबीन ने उनका स्वागत किया। उन्होंने यहाँ 'Know BJP' पहल के तहत नितिन नबीन से मुलाकात की। BJP की प्रेस रिलीज के अनुसार, "इस दौरे का उद्देश्य RSP और BJP के बीच पार्टी-स्तरीय संवाद की शुरुआत करना और सांगठनिक कार्यप्रणालियों, लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं तथा जन-केंद्रित राजनीतिक पहुँच के विषयों पर विचारों के आदान-प्रदान का अवसर प्रदान करना है।" स्वागत के दौरान लामिछाने पर फूलों की वर्षा की गई। साथ ही उन्हें पारंपरिक मिथिला पाग भी पहनाई गई।

सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल के साथ उनकी उच्च-स्तरीय बैठकें भी होने वाली हैं। वो 5 जून को नेपाल लौटने से पहले अयोध्या का दौरा भी करेंगे।

इस दौरे से कुछ दिन पहले, नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने वहां की संसद में एक विवादित बयान दिया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि "प्रधानमंत्री बनने के बाद मुझे पता चला कि न केवल भारत ने नेपाल की जमीन पर कब्जा किया है, बल्कि नेपाल ने भी कई जगहों पर भारत की जमीन पर कब्जा किया है। इस मामले को सुलझाने के लिए, दोनों देशों का इरादा दोस्तों की तरह बैठकर बातचीत करने का है।"

हालांकि इस बयान के बाद नेपाल का विपक्ष उन पर हावी हो गया। नेपाली कांग्रेस की बासना थापा और नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के रमेश कुमार मल्ल ने उनकी टिप्पणियों पर आपत्ति जताई और मांग की कि उन्हें संसदीय रिकॉर्ड से हटा दिया जाए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री या तो सबूत पेश करें या फिर अपना बयान वापस ले लें। नेपाल के पूर्व विदेश मंत्री प्रदीप कुमार ज्ञावली ने भी उनसे माफी की मांग की है।

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