कांग्रेस लीडर और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को एक पुराने मानहानि मामले में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट से राहत मिली है। अदालत ने राहुल के खिलाफ चल रही आपराधिक मानहानि की कार्रवाई को खत्म कर दिया है। यह फैसला तब आया, जब उन्होंने कोर्ट में लिखित रूप से अपनी टिप्पणी पर खेद जताया और शिकायतकर्ता कार्तिकेय सिंह चौहान ने इसे स्वीकार कर लिया। ये मामला 2018 का है, जब राहुल झाबुआ में एक चुनावी रैली को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने दौरान गलत दावा किया था कि पनामा पेपर्स लीक में पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के बेटे कार्तिकेय का नाम शामिल था।
इसके बाद कार्तिकेय ने भोपाल की MP-MLA कोर्ट में राहुल के खिलाफ मानहानि की शिकायत दर्ज की थी। इसके बाद निचली अदालत द्वारा राहुल को पेश होने के लिए समन भी जारी किए थे। इस आदेश को चुनौती देते हुए उन्होंने हाई कोर्ट का रूख किया था। हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान राहुल गांधी की ओर से आवेदन दिया गया, जिसमें उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका इरादा कार्तिकेय या उनके पिता शिवराज सिंह चौहान का नाम लेने का नहीं था। उन्होंने कहा कि भाषण के दौरान गलती से नाम निकल गया था और इसके लिए वह खेद व्यक्त करते हैं।
राहुल गांधी ने यह भी बताया कि रैली के अगले दिन 30 अक्टूबर 2018 को उन्होंने सार्वजनिक रूप से स्पष्ट कर दिया था कि उनका संदर्भ छत्तीसगढ़ के तत्कालीन मुख्यमंत्री के बेटे से जुड़ा था, जिनका नाम पनामा पेपर्स मामले में आया था। कार्तिकेय की ओर से पेश वकीलों ने कोर्ट को बताया कि राहुल गांधी द्वारा खेद जताए जाने के बाद वे इस मामले को आगे नहीं बढ़ाना चाहते। दोनों पक्षों की सहमति के बाद मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने मामले में चल रही कार्यवाही समाप्त करने का आदेश दे दिया। हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद राहुल गांधी के खिलाफ यह कानूनी विवाद खत्म हो गया है।