स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने आज एक बड़ा फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) के उस फैसले को सही ठहराया है, जिसके तहत बिहार में वोटर लिस्ट का SIR शुरू किया गया था। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने यह फैसला दिया है कि SIR प्रक्रिया को सिर्फ इसलिए गैर-कानूनी कहकर रद्द नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह वोटर लिस्ट के आम रिवीजन की प्रक्रिया से अलग है। कोर्ट ने SIR को एक वैध और संवैधानिक प्रक्रिया बताया है। उन्होंने आगे कहा, "यह प्रक्रिया कानूनी तौर पर सही है।"
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि निष्पक्ष चुनावों के लिए यह प्रक्रिया जरूरी है। CJI की अध्यक्षता वाली बेंच ने अपनी टिप्पणी में कहा, "ये नहीं कहा जा सकता कि चुनाव आयोग ने SIR का इस्तेमाल करके अपनी कानूनी शक्तियों से बाहर जाकर काम किया है।" इस निर्णय के बाद अलग-अलग पार्टियों द्वारा विभिन्न प्रकार के बयान भी सामने आ रहे हैं। जनता दल-यूनाइटेड (JD-U) के नेता नीरज कुमार ने कहा, "विपक्ष की कई पार्टियाँ SIR को एक राजनीतिक मुद्दा बता रही थीं, अब सुप्रीम कोर्ट ने इस पर फैसला सुना दिया है। ECI जैसी संवैधानिक संस्था पर बार-बार हमले किए जा रहे थे। अब सुप्रीम कोर्ट ने इस पर अपनी मुहर लगा दी है। विपक्षी पार्टियों को अब यह बताना चाहिए कि वे SIR के खिलाफ क्यों हैं।"
कांग्रेस से राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी ने अपने विचार प्रकट करते हुए कहा कि, "मुद्दा यह नहीं है कि चुनाव आयोग SIR करवा सकता है या नहीं,आखिरकार हमने पहले भी चुनाव आयोग से SIR करवाया है। लेकिन तब प्रक्रिया अलग होती थी, इसमें 4 साल लगते थे। जबकि अभी स्थिति अलग है। ज्ञानेश कुमार के मामले में, जब आम चुनाव बस कुछ ही समय दूर हैं, बिहार, बंगाल या उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में चुनावों से ठीक पहले इस तरह का काम करना बिल्कुल भी मुमकिन नहीं है। सवाल उन लाखों लोगों के बारे में बना हुआ है जिन्हें लिस्ट से बाहर कर दिया गया था और जिन्होंने बाद में अपील दायर की। ठीक इसी वजह से हमने राज्यसभा में उनके खिलाफ एक प्रस्ताव पेश किया। जहाँ तक फैसले की बात है, हम इसे एक नैतिक जीत मानते हैं, क्योंकि सरकार और न्यायपालिका दोनों ही उन खास सवालों और मुद्दों पर पूरी तरह से चुप हैं।"
वहीं भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय महासचिव तरूण चुघ ने इस मुद्दे पर कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि चुनाव आयोग के पास लोकतंत्र को मजबूत करने और वोटर लिस्ट को पारदर्शी बनाने का संवैधानिक अधिकार हैं। वोटर लिस्ट की सफाई बहुत जरूरी है। विपक्ष ने SIR को लेकर लोगों को गुमराह करने की कोशिश की। आज, सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें इसका करारा जवाब दिया है। वोटर लिस्ट की सफाई आज की जरूरत है। लेकिन कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्ष को नकली और घुसपैठिये वोटर ज्यादा प्यारे थे। उन्हें अपनी वोट बैंक की राजनीति की चिंता थी। इसलिए, उन्होंने हर सुधारात्मक कदम का विरोध किया।"