भाजपा आज मना रही अपना 47वां स्थापना दिवस, मोदी-शाह ने देशभर में फैले पार्टी कार्यकर्ताओं को दी शुभकामनाएं

ऐसे राज्य जहां भाजपा का नामोनिशान नहीं था, वहां पर भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के व्यक्तित्व का असर देखने को मिला है। इनमें असम, त्रिपुरा, मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्य हैं, जहां भाजपा के नेतृत्व में सरकार का गठन हुआ है। इसके अलावा इस सूची में मेघालय और नागालैंड जैसे राज्य भी हैं, जहां भाजपा एक सहयोगी दल की भूमिका निभा रही है।

भाजपा आज मना रही अपना 47वां स्थापना दिवस, मोदी-शाह ने देशभर में फैले पार्टी कार्यकर्ताओं को दी शुभकामनाएं

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा की भाजपा कार्यकर्ता अपनी निस्वार्थ सेवा और अटूट समर्पण के लिए जाने जाते है।

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Highlights

  • भाजपा की स्थापना 6 अप्रैल 1980 को अटल बिहारी वाजपेयी और लाल कृष्ण आडवाणी जैसे नेताओं द्वारा की गई थी
  • प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भाजपा "इंडिया फर्स्ट" के सिद्धांत से प्रेरित होकर समाज की सेवा करने में आगे रही है।
  • गृह मंत्री शाह ने बताया की भाजपा का मूल मंत्र हमेशा स्पष्ट रहा है, नेशन फर्स्ट, पार्टी नेक्स्ट, सेल्फ लास्ट।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) आज अपना 47वां स्थापना दिवस मना रही है। इस अवसर पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशभर में फैले भाजपा के कार्यकर्ताओं को शुभकामनाएं दीं। X पर एक ट्वीट में उन्होंने लिखा, "हमारी पार्टी हमेशा 'इंडिया फर्स्ट' के सिद्धांत से प्रेरित होकर, समाज की सेवा करने में सबसे आगे रही है। हमारे कार्यकर्ता अपनी निस्वार्थ सेवा, अटूट समर्पण और सुशासन के प्रति गहरे जुनून के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने जमीनी स्तर पर अथक परिश्रम किया है, यह सुनिश्चित करते हुए कि ज्यादा से ज्यादा लोग हमारी विचारधारा और कार्यों से जुड़ सकें।" 

उन्होंने आगे लिखा, "हम उन अनगिनत कार्यकर्ताओं को भी याद करते हैं, जिनके समर्पण, बलिदान और दृढ़ता ने दशकों से पार्टी के विकास को आकार दिया है। भाजपा एक ऐसी पार्टी के रूप में खड़ी है, जो लोगों के कल्याण को अपने दृष्टिकोण के केंद्र में रखती है। यह हमारे केंद्र और विभिन्न राज्यों में किए जा रहे कार्यों में स्पष्ट रूप से झलकता है। भाजपा एक विकसित भारत के निर्माण के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। हमारा सामूहिक संकल्प इस दृष्टिकोण को निरंतर आगे बढ़ाता रहे और भारत को प्रगति एवं समृद्धि की नई ऊंचाइयों पर ले जाए।

इस अवसर पर भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और वर्तमान में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी लिखा कि, "चाहे देश की सीमाओं को सुरक्षित करना हो, आंतरिक सुरक्षा को मजबूत बनाना हो, विकास के नए मानदंड स्थापित करना हो या भारतीय संस्कृति की ऐतिहासिकता और प्राण तत्व को पुन: जागृत करना हो, भाजपा ने अपने इन सभी संकल्पों को चरितार्थ करके दिखाया है। 

उन्होंने आगे कहा कि, "भाजपा का मूल मंत्र हमेशा स्पष्ट रहा है, नेशन फर्स्ट, पार्टी नेक्स्ट, सेल्फ लास्ट। इसी मूल भावना के साथ भाजपा का हर कार्यकर्ता दिन-रात राष्ट्र-सेवा में समर्पित है। भाजपा के स्थापना दिवस के अवसर पर मैं उन सभी महानुभावों को नमन करता हूँ, जिन्होंने ऋषि दधीचि के समान राष्ट्रहित सर्वोपरि के महान यज्ञ में अपना सर्वस्व अर्पण कर भाजपा को एक विराट वटवृक्ष बनाने में अहम योगदान दिया है।"

एक खास बात यह भी रही कि आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री और तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी) के मुखिया एन. चंद्रबाबू नायडू ने भी भाजपा को उनके स्थापना दिवस की बधाई दी, जबकि वो एक अलग दल और विचारधारा से आते हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रवाद की जड़ों से जुड़ी और देश के सर्वांगीण विकास के लिए समर्पित यह पार्टी, हमारी संस्कृति और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने, समावेशी विकास को बढ़ावा देने और राष्ट्र सेवा की भावना को बनाए रखने की दिशा में लगातार काम करती रही है।

भाजपा की स्थापना 6 अप्रैल 1980 को अटल बिहारी वाजपेयी, लाल कृष्ण आडवाणी, डॉ. मुरली मनोहर जोशी और राजमाता विजया राजे सिंधिया जैसे कई दिग्गज नेताओं द्वारा की गई थी। हालांकि इसकी जड़ें भारतीय जन संघ से जुड़ी हैं, जिसकी स्थापना 21 अक्टूबर 1951 में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी द्वारा की गई थी।

भाजपा के गठन के बाद अटल बिहारी वाजपेयी को पार्टी का प्रथम अध्यक्ष चुना गया था। उनके नेतृत्व में पार्टी ने खुद को एक सेंट्रिस्ट पार्टी के रूप में पेश किया था। हालांकि 1984 के लोकसभा चुनावों में उन्हें इसका कोई फायदा प्राप्त नहीं हुआ। इन चुनावों में पार्टी केवल 2 सीटें ही जीतने में सफल रही थी। इन विजेताओं में मेहसाणा से डॉ. ए.के. पटेल और हनमकोंडा से सी. जंगा रेड्डी जैसे नाम शामिल थे।

इस खराब प्रदर्शन के बाद, 1986 में लाल कृष्ण आडवाणी ने पार्टी की कमान संभाली। 1986 में आडवाणी ने अटल बिहारी वाजपेयी के बाद अध्यक्ष का पद संभाला। उनके नेतृत्व में पार्टी कट्टर हिंदुत्व की ओर मुड़ गई थी। इसका सबसे बड़ा उदाहरण 1990 में आडवाणी के नेतृत्व में निकाली गई राम रथ यात्रा थी, जिसका मकसद हिंदू राष्ट्रवाद की भावना को जगाकर चुनावी समर्थन हासिल करना था। पार्टी ने 1989 में 83 सीटों की छलांग लगाई और 85 सीटों पर पहुंच गई थी। 1991 में भी उनकी सीटों में वृद्धि हुई और पार्टी 120 सीटों तक पहुंच गई। 1998 से 2004 तक वाजपेयी के प्रधानमंत्री के रूप में, भारत में पहली बार भाजपा-ंNDA सरकार सत्ता में आई। 

हालांकि इसके बाद 10 वर्षों तक पुनः भाजपा को विपक्ष में बैठना पड़ा। 2014 में नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री के रूप में प्रोजेक्ट किया गया और पार्टी को इसका पूरा-पूरा फायदा मिला। 2014 में पार्टी ने अकेले ही 282 सीटें जीतीं और स्पष्ट बहुमत हासिल किया। 1984 के बाद पहली बार किसी एक पार्टी को बहुमत मिला था। 2019 में पार्टी ने अपने प्रदर्शन में सुधार किया और भाजपा सांसदों की संख्या 282 से बढ़कर 303 हो गई। हालांकि 2024 में ये आंकड़ा गिरकर 240 हो गया।

हालांकि अब भी केंद्र में 292-293 सांसदों के साथ भाजपा-NDA सरकार बनी हुई है, जिसमें जनता दल यूनाइटेड (जदयू) और टीडीपी जैसे पार्टियां का भी महत्व है। प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल में भारत में कई ऐतिहासिक निर्णय लिए गए। इनमें आर्टिकल 370 को हटाना, अयोध्या में श्रीराम मंदिर का निर्माण, ट्रिपल तलाक को अपराध घोषित करना आदि प्रमुख है।

2014 के पहले भी मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में भाजपा सरकार रही है, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के चेहरे पर ही सर्वप्रथम 2017 में उत्तर प्रदेश जैसे बड़े प्रदेश में पूर्ण बहुमत से सरकार बनी थी। 2022 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अच्छे प्रदर्शन के बदौलत पार्टी ने लगातार दूसरी बार सत्ता में आकर एक नया रिकॉर्ड कायम किया

इसके अलावा ऐसे राज्य जहां भाजपा का नामोनिशान नहीं था, वहां भी प्रधानमंत्री मोदी के व्यक्तित्व का असर देखने को मिला। इनमें असम, त्रिपुरा, मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्य हैं, जहां भाजपा के नेतृत्व में सरकार का गठन हुआ है। इसके अलावा इस सूची में मेघालय और नागालैंड जैसे राज्य भी हैं, जहां भाजपा एक सहयोगी दल की भूमिका निभा रही है।

इन राज्यों के अलावा हरियाणा, महाराष्ट्र, गोवा, उत्तराखंड, गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे राज्य भी हैं, जहां भाजपा की स्थिति मजबूत है और वो फिलहाल सत्ता में भी है। आने वाले समय में पार्टी की नजर पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल जैसे राज्यों पर भी है, जहां वो अपनी सीटों की संख्या बढ़ाना चाहेगी अथवा खुद के बल या फिर सहयोगी दल के रूप में पहली बार सत्ता का स्वाद चखना चाहेगी।

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