पश्चिम बंगाल की राजनीति में, इस समय एक बहुत बड़ा भूचाल सामने आया है। पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) इस समय बिखराव की स्थिति से गुजर रही है। TMC से निष्कासित किए गए विधायक ऋतब्रत बनर्जी ने दावा किया है कि उनके पास 59 विधायकों का लिखित समर्थन है। अगर ये वाकई में सच है, तो ममता बनर्जी के लिए ये बहुत बड़ा संकट बन सकता है। 2026 के चुनावों में TMC मात्र 80 सीटें ही जीत पाई थी। यदि बगावत होती है, जिसकी पूरी-पूरी संभावना नजर आ रही है, तो इसके बाद ममता बनर्जी के पास सिर्फ 20 से 21 विधायक ही बचेंगे।
ममता से अलग हुए गुट को आधिकारिक मान्यता के लिए 54 विधायकों के समर्थन की जरूरत होगी, जो संख्या फिलहाल तो ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा के पास नजर आ रही है। ताजा खबरों के अनुसार, सभी विधायक एक मिनी बस में विधानसभा पहुंच चुके हैं, जिससे वहां हंगामा होने की उम्मीद बढ़ गई है। TMC विधायक मुस्तफिजुर रहमान ने बताया कि, "हमें सही आंकड़ा नहीं पता। मुझे बाहर से पता चल रहा है कि 59 सिग्नेचर्स मिल चुके हैं। मैं ऐसा सुन रहा हूँ। मैंने भी सिग्नेचर किया हैं।" बगावत करने वालों में ममता बनर्जी के कई करीबी नेता और पूर्व मंत्री भी शामिल हैं।
इनमें अरूप बिस्वास, जावेद अहमद खान, सबीना यास्मीन जैसे लोग विधानसभा पहुंच चुके हैं। बागी गुट के सदस्य ये दावा कर चुके हैं कि उन्हें TMC के 80 में से ज़्यादातर विधायकों का समर्थन हासिल है और उन्होंने ममता बनर्जी द्वारा शोभनदेव चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता बनाए जाने पर आपत्ति जताई। पार्टी में टूट के संकेत तो पहले ही सामने आ गए थे, जब 6 मई को ममता बनर्जी के घर हुई पहली विधायक दल की बैठक में 69 विधायक ही शामिल हुए थे।
19 मई को ये संख्या घटकर 64 तो 31 मई को ये संख्या सिर्फ 19 ही रह गई। कल भी ममता बनर्जी के धरना प्रदर्शन में समर्थकों की भीड़ तो थी, मगर कुछ गिने-चुने प्रमुख नेता ही वहां नजर आए थे। अन्य चर्चित नाम वहां से गायब थे। ताजा घटनाक्रम में, बागी विधायक स्पीकर रथींद्र बोस को अपना पात्र सौंप चुके हैं। बताया जा रहा है कि स्पीकर आज शाम 4 बजे तक अपना फैसला सुना सकते हैं।