पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को उनका अब तक का सबसे बड़ा झटका लगा है। उनकी तृणमूल कांग्रेस (AITC) के 20 बागी सांसदों ने पार्टी से अलग होकर अपनी एक नई राह चुन ली है। वो लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मिले और उन्हें एक चिट्ठी सौंपी। इसमें उन्होंने लिखा है कि वो एक नई पार्टी नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में शामिल हो रहे हैं।
स्पीकर से मुलाकात के बाद बागी सांसद डॉ. काकोली घोष दस्तीदार ने कहा, "AITC से चुने गए हम बीस सांसदों ने स्पीकर से मुलाकात की और अलग बैठने का अनुरोध करते हुए एक पत्र सौंपा। ये बीस सांसद हमारी कुल संख्या का दो-तिहाई से ज्यादा हिस्सा हैं। हम नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी में विलय कर रहे हैं। आगे चलकर, हम देश के लिए काम करेंगे और प्रधानमंत्री के नेतृत्व में नेशनल डेमोक्रेटिक अलायन्स (NDA) के साथ मिलकर काम करेंगे।"
इस गुट में काकोली के अलावा सुदीप बंद्योपाध्याय, शताब्दी रॉय, माला रॉय और प्रसून बनर्जी जैसे नेता शामिल हैं। बता दें कि NCPI का गठन 2022 में त्रिपुरा में हुआ था और इस दल की पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा में सीमित मौजूदगी है। जानकारी के अनुसार, इस पार्टी ने त्रिपुरा में 2023 के विधानसभा चुनावों में अपने चार उम्मीदवारों की भी उतारा था, मगर एक भी प्रत्याशी जीत नहीं पाया था। विलय को आधिकारिक मंजूरी मिलने के बाद NCPI, NDA की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी और लोकसभा में पांचवीं सबसे बड़ी पार्टी बन जाएगी।
तेलुगू देशम पार्टी (TDP) और जनता दल-यूनाइटेड (JDU) भी क्रमशः 16 और 12 सांसदों के साथ NCPI से कुछ सीटें पीछे हैं। NDA के संख्याबल में भी वृद्धि हुई है। अब गठबंधन के सांसदों की संख्या बढ़कर 313 हो गई है। दूसरी ओर लोकसभा में AITC के नेता अभिषेक बनर्जी ने स्पीकर बिरला से आग्रह किया कि वे इस अलग हुए गुट को कोई मान्यता न दें।
सुदीप बंद्योपाध्याय ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि "हम 'नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी' में शामिल हो गए हैं। यह एक पॉलिटिकल पार्टी है। यह एक मान्यता प्राप्त रीजनल पार्टी है। हमने इसमें विलय कर लिया है।" उन्होंने यह भी बताया कि बागी गुट असली तृणमूल कांग्रेस के तौर पर मान्यता पाने के लिए अदालत में भी लड़ाई लड़ेगा और पार्टी के चुनाव चिह्न पर अपना दावा पेश करेगा।
बागी सांसद असित कुमार मल ने भी अपने विचार प्रकट करते हुए कहा, "20 लोकसभा सांसदों ने लोगों के भले और क्षेत्रीय विकास के लिए समर्पित एक ग्रुप बनाने के लिए साइन किया है। हमारा मानना है कि सरकार के कार्यक्रमों से जनता को फायदा होगा, इसीलिए हम उनका समर्थन कर रहे हैं। अब तृणमूल कांग्रेस का कोई अस्तित्व नहीं दिखता, इसलिए पार्टी में रहते हुए विकास के लिए काम करने का सवाल ही नहीं उठता। पार्टी के टूटने के लिए कौन जिम्मेदार है, इसका जवाब सिर्फ लीडरशिप ही दे सकती है। चुनाव के बाद हमारी हार पर कोई चर्चा नहीं हुई।"