केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह आज गुजरात के भुज पहुंचे, जहां उन्होंने बॉर्डर आउट पोस्ट G-7 और G-13 का उद्घाटन किया। इसकी तस्वीरें X पर साझा करते हुए उन्होंने लिखा, "मोदी सरकार भारत की सीमाओं को और अधिक सुरक्षित, सशक्त एवं अभेद्य बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी संकल्प के तहत आज गुजरात के भुज में बॉर्डर आउट पोस्ट G-7 और G-13 का उद्घाटन किया। इस अवसर पर सीमा की रक्षा में दिन-रात तत्पर रहने वाले BSF के वीर एवं सतर्क जवानों से संवाद भी किया।"
गृह मंत्री शाह ने इस कार्यक्रम को संबोधित भी किया, जहां गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्रभाई पटेल, उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी, केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन, इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के चीफ तपन कुमार डेका और बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) के डायरेक्टर जनरल प्रवीण कुमार भी उपस्थित थे।
अपने भाषण में उन्होंने कहा, "सबसे दुर्गम चौकियों में से एक चौकी पर, मैं अपने उन सभी सीमा प्रहरियों को राम-राम और प्रणाम करता हूँ। जब भी मैं BSF के जवानों के बीच आता हूँ, तो मेरी सारी थकान पल भर में दूर हो जाती है। क्योंकि जब हम चौकी पर पहुँचते हैं, तो हमें तुरंत यह एहसास हो जाता है कि जिस जगह पर आप तैनात हैं, वहाँ रहना कितना कठिन है। यहाँ आने के बाद, जब हम आपको मुस्कुराते हुए चेहरों के साथ भारत की सीमाओं की रक्षा करते हुए देखते हैं, तो हमें लगता है कि हमारा काम तो बहुत आसान है। कम से कम, हमें तो थकने का अधिकार नहीं है।"
उन्होंने आगे बताया कि, "BSF को अपनी स्थापना के बाद से, पिछले 60 वर्षों में, 1966 से 2026 तक, दो सबसे कठिन सीमाओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी गई है। एक पाकिस्तान के साथ और दूसरी बांग्लादेश के साथ। इन सीमाओं में इतना भारी अंतर है कि जब तक कोई BSF जवान रिटायर होता है, तब तक उसे -45 डिग्री से लेकर +45 डिग्री तक की अत्यधिक विषम परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है।"
गृह मंत्री शाह ने कहा कि यहां से कुछ किलोमीटर दूर, बनासकांठा में एक सेंटर बनाया गया है, ताकि लोगों को उन कठिन ड्यूटी से रूबरू कराया जा सके जिनका सामना BSF को करना पड़ता है। इसे बनाने में लगभग पौने दो सौ करोड़ रुपये का खर्च आया है। आज करीब एक महीने में गुजरात की 2.5 लाख से ज्यादा जनता BSF की ड्यूटी का परिचय ले चुकी है।
शुरूआत में, 6 महीनों तक, मैंने वहां BSF के बारे में लोगों की राय जानने के लिए एक फीडबैक फॉर्म और एक तरह का जनमत संग्रह भी चलाया था। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि कई लोगों ने लिखा कि वे उम्मीद करते हैं कि उनके बेटे और बेटियाँ बड़े होकर BSF में शामिल होंगे और इससे उन्हें गर्व महसूस होगा।
उन्होंने आगे कहा, "हम यहां की विषम आबोहवा और जलवायु के कारण आपकी जो दिक्कतें हैं, उन्हें कम नहीं कर सकते। वो आपकी ड्यूटी का हिस्सा है। मगर हम ऐसी सुविधाएं जरूर दे सकते हैं, जिससे आपको कम से कम तकलीफ हो। इसके लिए देश के प्रधानमंत्री और गृह मंत्रालय, दोनों ही लगातार प्रतिबद्ध हैं और काम कर रहे हैं। जब बजट की बात आती है, तो हमने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और आवश्यक उपायों को लागू करने के लिए तकनीक का उपयोग करने में हमने कभी कोई कसर नहीं छोड़ी।"