पश्चिम बंगाल के ‘चाणक्य’ मुकुल रॉय का निधन, राजनीति के एक युग का हुआ अंत

मुकुल रॉय 1998 से 2015 तक तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव भी रहे। 2006 में उन्हें राज्यसभा भेजा गया और 2009 में वे सदन में पार्टी के नेता भी चुने गए।

पश्चिम बंगाल के ‘चाणक्य’ मुकुल रॉय का निधन, राजनीति के एक युग का हुआ अंत

मुकुल रॉय के निधन से पश्चिम बंगाल के राजनीतिक इतिहास में एक युग का अंत हो गया है।

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Highlights

  • 71 साल की उम्र में मुकुल रॉय का कार्डियक अरेस्ट से निधन।
  • टीएमसी के संस्थापक नेताओं में रहे और पार्टी संगठन को मजबूत किया।
  • टीएमसी और भाजपा दोनों में अहम भूमिका निभाने वाले वरिष्ठ नेता थे।

पश्चिम बंगाल की राजनीति में चाणक्य के नाम से मशहूर और तृणमूल कांग्रेस के संस्थापक सदस्यों में शामिल मुकुल रॉय का सोमवार, 23 फरवरी को निधन हो गया। वह 71 वर्ष के थे। कोलकाता के अपोलो मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल में सोमवार तड़के 1:30 बजे उन्हें कार्डियक अरेस्ट आया था। डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन मुकुल रॉय को बचाया नहीं जा सका। उनके बेटे और पूर्व विधायक सुभ्रांशु रॉय ने उनके निधन की पुष्टि की। मुकुल रॉय लंबे समय से बीमार चल रहे थे। वे डिमेंशिया से पीड़ित थे और कुछ दिनों पहले कोमा में भी चले गए थे। 1998 में जब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कांग्रेस से अलग होकर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी)​ की स्थापना की थी, तब मुकुल रॉय पार्टी के शुरुआती और अहम नेताओं में से एक थे।

मुकुल रॉय की पार्टी संगठन में मजबूत पकड़ मानी जाती थी और तृणमूल कांग्रेस के विस्तार में उन्होंने अहम भूमिका निभाई थी। उस दौर में वे ममता बनर्जी के बाद सबसे प्रभावशाली नेता माने जाते थे। मुकुल रॉय 1998 से 2015 तक तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव भी रहे। 2006 में उन्हें राज्यसभा भेजा गया और 2009 में वे सदन में पार्टी के नेता भी चुने गए। मुकुल रॉय तृणमूल कांग्रेस के ‘संकटमोचक’ के नाम से भी विख्यात थे। उन्होंने 2017 तक राज्यसभा में अपनी सेवाएं दीं। मुकुल रॉय पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार में केंद्रीय राज्य मंत्री भी रहे। उन्होंने रेलवे मंत्रालय और शिपिंग मंत्रालय जैसे मंत्रालयों में भी अपनी सेवाएं दीं। 2017 में उन्होंने टीएमसी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) जॉइन की। 2019 के लोकसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल में भाजपा के प्रदर्शन को मजबूत करने में उनकी भी भूमिका मानी जाती है। हालांकि, 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद वे फिर से तृणमूल कांग्रेस में लौट आए। उनके निधन के साथ पश्चिम बंगाल की राजनीति का एक महत्वपूर्ण अध्याय समाप्त हो गया है।

उनके निधन पर तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने X पर लिखा, "मुकुल रॉय के निधन से बंगाल के राजनीतिक इतिहास में एक युग का अंत हो गया है। वे तृणमूल कांग्रेस के संस्थापक स्तंभों में से एक थे और उन्होंने संगठन के शुरुआती वर्षों में इसे मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। सार्वजनिक जीवन के प्रति उनके समर्पण को प्रशंसा के साथ याद किया जाएगा। मैं उनके परिवार, मित्रों और प्रशंसकों के प्रति अपनी हार्दिक संवेदना व्यक्त करता हूँ। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें।" प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए लिखा, "पूर्व केंद्रीय मंत्री श्री मुकुल रॉय जी के निधन से गहरा दुःख हुआ। उन्हें उनके राजनीतिक अनुभव और समाज सेवा के प्रयासों के लिए हमेशा याद किया जाएगा। उनके परिवार और समर्थकों के प्रति हमारी गहरी संवेदनाएं।"

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