इजराइल के भविष्य और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के राजनीतिक करियर के लिए आज का दिन बेहद निर्णायक है। देश में 26वीं नेसेट (संसद) के सभी 120 सदस्यों को चुनने के लिए आज मतदान हो रहा है। करीब 73 लाख मतदाता अपने मताधिकार के जरिए यह तय करेंगे कि बेंजामिन नेतन्याहू सत्ता में बने रहेंगे या फिर देश की कमान किसी नए राजनीतिक दल या गठबंधन के हाथों में जाएगी। हालांकि, इजराइल के 76 साल के इतिहास में आज तक किसी भी राजनीतिक पार्टी ने यहां अकेले पूर्ण बहुमत हासिल नहीं किया है।
मीडिया से बात करते हुए एक मतदाता ने बताया कि, "मुझे लगता है कि हमें अपने देश को तानाशाही से बचाना है, जो तब हो सकती है अगर नेतन्याहू फिर से अपनी सीट जीत जाएं। दुर्भाग्य से, उन्होंने हमारे देश और हमारे लोगों को दो समूहों में बांट दिया है, असली यहूदी और जो असली यहूदी नहीं हैं। मुझे लगता है कि ऐसा करना सही नहीं है और मैं यहां उनके खिलाफ वोट देने आया हूं, साथ ही उन मूल्यों के समर्थन में भी, जिनमें मेरा विश्वास है। अंतरराष्ट्रीय संबंधों के लिहाज से, हमें निश्चित रूप से अपने तौर-तरीकों में बदलाव करने की जरूरत है। मेरा मानना है कि यह खास तौर पर नेतन्याहू की ही विफलता है, क्योंकि उनका रवैया बहुत कट्टर है और इजरायल के ज्यादातर लोग असल में इसका समर्थन नहीं करते हैं।"
वहीं एक अन्य मतदाता ने बताया कि यह चुनाव इजराइल के इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने आगे कहा कि हमें बदलाव की जरूरत है और हमें लोकतंत्र की ओर वापस लौटना होगा, क्योंकि हमनें लोकतंत्र, ईमानदारी और कानून के शासन जैसे मूल्यों को खो दिया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पिछले 20 वर्षों में, राजनीतिक दायरे के एक पक्ष ने कानून का सम्मान नहीं किया है।
ओपिनियन पोल्स के रुझानों पर नजर डालें तो मुख्य मुकाबला वर्तमान प्रधानमंत्री व लिकुड (Likud) पार्टी के अध्यक्ष बेंजामिन नेतन्याहू और यशार (Yashar) पार्टी के नेता व IDF के पूर्व चीफ ऑफ जनरल स्टाफ गादी आइसेनकोट के बीच देखा जा रहा है। सर्वेक्षणों में जहां आइसेनकोट की पार्टी को 22-23 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है, वहीं कुछ पोल्स में नेतन्याहू की लिकुड पार्टी आगे चल रही है। हालांकि, दोनों में से किसी भी गुट को सरकार बनाने के लिए जरूरी 61 सीटों का स्पष्ट बहुमत मिलता नहीं दिख रहा है। ऐसे में सत्ता की असली तस्वीर आधिकारिक नतीजे घोषित होने के बाद ही साफ होगी।