मई 2025 में हुए 'ऑपरेशन सिंदूर' को लेकर केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला किया है। सरकार ने इस सैन्य ऑपरेशन के दौरान, देश की रक्षा करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए 6 जांबाज सैनिकों के नाम सार्वजनिक किए हैं। सभी नाम दिल्ली स्थित नेशनल वॉर मेमोरियल की दीवार पर अंकित किए गए हैं, जो इन वीर बलिदानियों को एक श्रद्धांजलि है। इसके अलावा इन बहादुरों की यूनिट के नाम भी दीवार पर लिखे गए हैं। ये नाम नेशनल वॉर मेमोरियल की वेबसाइट पर भी प्रकाशित किए गए हैं। इनमें से 5 सेना से और एक वायु सेना (IAF) से था।
सर्वोच्च बलिदान देने वालों में राइफलमैन सुनील कुमार, सूबेदार मेजर पवन कुमार, AV मुरली नायक, लांस नायक दिनेश कुमार, हवलदार सुनील कुमार सिंह और IAF के सार्जंट सुरेंद्र कुमार शामिल हैं। राइफलमैन सुनील कुमार को मरणोपरांत वीर चक्र (VrC) और सार्जंट सुरेंद्र कुमार को मरणोपरांत वायु सेना मेडल (VM) से भी सम्मानित किया जा चुका है। एक बार फिर याद दिला दें कि, 22 अप्रैल 2025 जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में एक आतंकी हमला हुआ था, जिसमें 26 निर्दोष लोग मारे गए थे। मृतकों में अधिकांश पर्यटक थे, जो वहां घूमने आए थे।
आतंकियों ने पर्यटकों से उनके नाम और धर्म पूछे और विशेष रूप से उन लोगों को निशाना बनाया जो हिंदू थे। इस आतंकी हमले का जवाब देने के लिए हमारी सेनाओं द्वारा 'ऑपरेशन सिंदूर' लॉन्च किया गया था, जिसमें 8 से 9 आतंकी लॉन्चपैड्स को नष्ट कर दिया गया था और इस कार्रवाई में 100 से अधिक आतंकवादी मारे गए थे। हालांकि कांग्रेस ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरा है। उनका कहना है कि सरकार ने वीर सैनिकों के बलिदान को स्वीकार करने में एक साल की देरी कर दी।
राज्यसभा सांसद पवन खेड़ा ने सभी सैनिकों का उल्लेख करते हुए X पर एक पोस्ट में लिखा कि, "ये भारत के वे बहादुर बेटे हैं जिन्होंने पहलगाम हमले के बाद भारत की आन-बान-शान और हमारी बहनों के सुहाग की रक्षा करते हुए अपनी जान दे दी। उनके नाम देश की यादों में हमेशा के लिए दर्ज होने चाहिए थे। उनके परिवारों को यह देखना चाहिए था कि देश उनके बलिदान का सम्मान कर रहा है। इसके बजाय, बीजेपी सरकार ने पूरे एक साल तक उनके बलिदान को देश से छिपाए रखा। वही सरकार जो खुद को तिरंगे में लपेटती है और राष्ट्रवाद की बड़ी-बड़ी बातें करती है, उसने इन नायकों को वह सम्मान और पहचान नहीं दी जिसके वे हकदार थे।"