प्रधानमंत्री मोदी ने खेलो इंडिया डायलॉग को किया संबोधित, कहा जो खेलेगा, वो खिलेगा

प्रधानमंत्री ने लाल किले से देश का ध्यान खेलों से जुड़ी एक बड़ी चुनौती की ओर दिलाया। यह चुनौती ओलंपिक से जुड़ी है। ओलंपिक में शामिल कई खेलों में से भारतीय टीमें आधे खेलों में भी हिस्सा नहीं लेती हैं। इसका मतलब है कि हम मेडल टैली के एक बड़े हिस्से के लिए मुकाबला ही नहीं करते और यह स्थिति दशकों से बनी हुई है।

प्रधानमंत्री मोदी ने खेलो इंडिया डायलॉग को किया संबोधित, कहा जो खेलेगा, वो खिलेगा

5-15 साल की उम्र के खिलाड़ियों को खोजने के लिए टैलेंट सर्च अभियान की घोषणा की गई है।

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Highlights

  • प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर मां भारती की एक महान संतान मेजर ध्यानचंद का भी स्मरण किया।
  • खेल सिर्फ मेडल जीतना नहीं विकसित भारत के निर्माण में देश की युवा शक्ति और खेल क्षमता को एकजुट करने का अभियान है।
  • केंद्र सरकार भारत में 21वीं सदी का आधुनिक स्पोर्ट्स इकोसिस्टम बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए 'खेलो इंडिया डायलॉग' में हिस्सा लिया। देश भर से कई लोग इस कार्यक्रम से जुड़े। इस कार्यक्रम का मकसद युवाओं को भारत की खेल यात्रा से जोड़ना, उनकी उम्मीदों को साझा करना और युवाओं के नेतृत्व में एक मजबूत 'विकसित भारत' के लिए सुझाव देना है। उन्होंने इस मौके पर कार्यक्रम में मौजूद लोगों को वर्चुअली संबोधित भी किया। दो दिन बाद राष्ट्रीय खेल दिवस है और प्रधानमंत्री मोदी ने देश भर के युवाओं और खेल जगत से जुड़े सभी साथियों को इसकी अग्रिम शुभकामनाएं भी दीं।

उन्होंने बताया कि यह दिन माँ भारती की एक महान संतान मेजर ध्यानचंद को याद करने का भी अवसर है। 100 साल पहले, भारतीय सेना की हॉकी टीम न्यूजीलैंड के टूर पर गई थी और मेजर ध्यानचंद उस टीम का हिस्सा थे। वो टूर भारत और न्यूजीलैंड के स्पोर्ट्स रिलेशन्स के 100 वर्ष पूरे होने का आधार है। प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि इस 15 अगस्त को मैंने लाल किले से देश के सामने भारत का स्पोर्ट्स विजन रखा।

जब मैं खेलों की बात करता हूँ, तो यह सिर्फ मेडल जीतने तक ही सीमित नहीं है। यह एक विकसित भारत के निर्माण में भारत की खेल-शक्ति और युवा-शक्ति को एक साथ जोड़ने का अभियान है। प्रधानमंत्री के अनुसार, वो हमेशा से ये कहते आए हैं कि जो खेलता है, वहीं खिलता है और खेल में खिलने का मतलब सिर्फ मैदान पर जीतना नहीं है। इसका मतलब है व्यक्तित्व का खिलना, परिवार का खिलना और साथ ही देश का गौरव बढ़ाना। जब कोई खिलाड़ी सफल होता है, तो वह सफलता सिर्फ उसकी नहीं होती। इससे उसके परिवार की पहचान बढ़ती है, उसके स्कूल और कॉलेज का मान बढ़ता है और उसके जिले और राज्य की पहचान मजबूत होती है।

दुनिया उस शहर या राज्य को उस खिलाड़ी के नाम से पहचानने लगती है। प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि इस बार, लाल किले से मैंने देश का ध्यान खेलों से जुड़ी एक बड़ी चुनौती की ओर दिलाया। यह चुनौती ओलंपिक से जुड़ी है। ओलंपिक में शामिल कई खेलों में से भारतीय टीमें आधे खेलों में भी हिस्सा नहीं लेती हैं। इसका मतलब है कि हम मेडल टैली के एक बड़े हिस्से के लिए मुकाबला ही नहीं करते और यह स्थिति दशकों से बनी हुई है।

2012 के ओलंपिक में भारत ने सिर्फ 13 खेलों में हिस्सा लिया था। 20 से ज्यादा खेलों में भारत की कोई भागीदारी नहीं थी और इनमें से कई खेल ऐसे हैं जिनके बारे में शायद देश के लोगों ने कभी सुना भी न हो। दूसरे देश इन खेलों में मेडल जीतते हैं, फिर भी हम इनमें हिस्सा तक नहीं लेते। अपनी मेडल टैली को बढ़ाने के लिए, हमें इन खेलों में भी महारत हासिल करनी होगी। उनके अनुसार, जब हम 2036 के ओलंपिक की तैयारियों की बात करते हैं, तो हमारा ध्यान आज से ही उन खिलाड़ियों को तैयार करने पर होना चाहिए जो 2036 में अलग-अलग इवेंट्स के लिए क्वालीफाई करेंगे और उनमें हिस्सा लेंगे।

इसीलिए, मैंने लाल किले से 5 से 15 साल की उम्र के खिलाड़ियों को खोजने के लिए एक टैलेंट सर्च अभियान की घोषणा की है। इस प्रक्रिया में, हमें न सिर्फ बच्चे की दिलचस्पी देखनी चाहिए, बल्कि यह भी परखना चाहिए कि वे शारीरिक रूप से किस खेल के लिए उपयुक्त हैं और उन्हें उसी के हिसाब से ट्रेनिंग देनी चाहिए। मैं सभी को भरोसा दिलाता हूं कि सरकार आपके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी रहेगी और इसके लिए जो भी मदद जरूरी होगी, वह मुहैया कराएगी।

प्रधानमंत्री ने बताया कि हमारी सरकार भारत में 21वीं सदी का आधुनिक स्पोर्ट्स इकोसिस्टम बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। आज देश भर में एक ऐसा सिस्टम तैयार किया जा रहा है, जिसमें स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी से लेकर आधुनिक ट्रेनिंग सेंटर तक शामिल हैं, जो टैलेंट की पहचान करने से लेकर उसे ग्लोबल मंच तक पहुँचाने के हर चरण में मदद देता है। हम स्पोर्ट्स साइंस, ट्रेनिंग और कोचिंग में अपनी जानकारी और अनुभव साझा करने के लिए दूसरे देशों के साथ सहयोग भी बढ़ा रहे हैं।

यह कार्यक्रम खुद ही स्पोर्ट्स के प्रति सरकार की गंभीरता का सबूत है। 'खेलो इंडिया संवाद' सिर्फ स्पोर्ट्स पर चर्चा करने का कार्यक्रम नहीं है। यह बातचीत का एक ऐसा मंच है जहाँ हर एक विचार देश के स्पोर्ट्स विजन को नई दिशा दे सकता है। इसके अलावा, युवाओं के साथ यह बातचीत आपके विचारों और उम्मीदों को देश के सपनों के साथ जोड़ने का एक सशक्त माध्यम है।​

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