न्यूयॉर्क पहुंचे RSS प्रमुख मोहन भागवत, 29 अगस्त को करेंगे कार्यक्रम को संबोधित, जोहरान ममदानी ने जताया विरोध

जोहरान ममदानी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए, छत्तीसगढ़ सरकार के पूर्व कैबिनेट मंत्री और कुरूद से विधायक अजय चंद्राकर ने पूछा कि उनके विरोध करने से क्या होता है? वो क्यों विरोध कर रहे हैं? जोहरान ममदानी का पहले से ही भारी विरोध है। अमेरिकी राष्ट्रपति भी उनके खिलाफ हैं। वे खुलकर अपनी धार्मिक आस्था का प्रदर्शन करते हैं। उन्हें भागवत की बातें भी सुनना चाहिए। वे आधे सनातनी, आधे अफ्रीकी और आधे भारतीय हैं। उन्हें अमेरिकी कैसे कहा जा सकता है?​

न्यूयॉर्क पहुंचे RSS प्रमुख मोहन भागवत, 29 अगस्त को करेंगे कार्यक्रम को संबोधित, जोहरान ममदानी ने जताया विरोध

RSS प्रमुख मोहन भागवत 25 अगस्त से अमेरिका, कनाडा और यूके के दौरे पर है।

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Highlights

  • न्यूयॉर्क में भागवत का हुआ गर्मजोशी से स्वागत, महिलाओं ने माथे पर लगाया तिलक।
  • भाजपा सांसद भोला सिंह के अनुसार RSS को न समझने वाले देते है बेबुनियाद बयान।
  • शिवसेना प्रवक्ता शाइना एनसी ने ममदानी की तुष्टीकरण की राजनीति और दोहरे मापदंडों पर उठाए सवाल।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत अमेरिका के न्यूयॉर्क पहुंच चुके हैं। RSS के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर के एक X पोस्ट के अनुसार, "प्रवासी संगठनों के निमंत्रण पर, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी 25 अगस्त 2026 से अमेरिका, कनाडा और यूके का दौरा करेंगे। यह यात्रा RSS के चल रहे शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में हो रही है।" जानकारी के अनुसार, न्यूयॉर्क पहुंचने पर उनका बहुत गर्मजोशी से स्वागत किया गया और महिलाओं ने उनके माथे पर तिलक भी लगाया। 29 अगस्त को मैडिसन स्क्वायर गार्डन में 'यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन्स' के दौरान RSS प्रमुख भागवत भारतीय समुदाय को संबोधित करेंगे।

हालांकि, उनके इस दौरे को लेकर देश और विदेश, दोनों ही जगहों पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। जब न्यूयॉर्क के जोहरान ममदानी से पूछा गया कि क्या यह कार्यक्रम रद्द कर दिया जाना चाहिए, तो उन्होंने कहा, "मैं इस रैली का समर्थन नहीं करता, लेकिन मुझे नहीं पता कि शहर के पास किसी निजी कार्यक्रम को रद्द करने का अधिकार है या नहीं।"

इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए, छत्तीसगढ़ सरकार के पूर्व कैबिनेट मंत्री और कुरूद से विधायक अजय चंद्राकर ने पूछा कि उनके विरोध करने से क्या होता है? वो क्यों विरोध कर रहे हैं? जोहरान ममदानी का पहले से ही भारी विरोध है। अमेरिकी राष्ट्रपति भी उनके खिलाफ हैं। वे खुलकर अपनी धार्मिक आस्था का प्रदर्शन करते हैं। उन्हें भागवत की बातें भी सुनना चाहिए। वे आधे सनातनी, आधे अफ्रीकी और आधे भारतीय हैं। उन्हें अमेरिकी कैसे कहा जा सकता है?​

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद भोला सिंह ने कहा कि जो लोग RSS के बारे में नहीं जानते या जिन्हें इसकी समझ नहीं है, वे ही ऐसे गलत और बेबुनियाद बयान देते हैं। RSS लंबे समय से समाज सेवा और राष्ट्र-निर्माण के काम में लगातार लगा हुआ है।  ऐसे बयानों से कुछ नहीं बदलता। हम भले ही 2014 में सत्ता में आए हों, लेकिन RSS बहुत पहले से काम कर रहा है। किसी को भी समाज सेवा के प्रति हमारी प्रतिबद्धता पर सवाल उठाने का अधिकार नहीं है।

शिवसेना (SS) की प्रवक्ता शाइना एनसी ने भी बताया कि RSS की सेवा इंटरनेशनल ने अमेरिका में 200 से ज्यादा प्रोजेक्ट्स पर काम किया है। चाहे तूफान हो या COVID, वे हमेशा मौजूद रहे हैं। FBI ने उनकी तारीफ की है और उन्हें कभी भी चरमपंथी संगठन नहीं कहा है। ममदानी की इस तुष्टिकरण की राजनीति और दोहरे मापदंडों पर सवाल उठाए जाने चाहिए। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद सौगत रॉय ने कहा कि न्यूयॉर्क एक बहु-धार्मिक शहर है, जहां RSS की विचारधारा काम नहीं करेगी, और यही कारण है कि वे इसका विरोध कर सकते हैं।

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