भारत के दौरे पर दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग, कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर हुए

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "दोनों देशों के बीच वित्तीय प्रवाह को सुगम बनाने के लिए, हमने 'भारत-कोरिया फाइनेंशियल फोरम' की शुरुआत की है। बिजनेस को-ऑपरेशन को सुदृढ़ करने के लिए, हमने एक 'इंडस्ट्रियल को-ऑपरेशन कमेटी' का गठन किया है। क्रिटिकल टेक्नोलॉजी और सप्लाई चैन के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए, हम इकोनॉमिक सिक्योरिटी डायलॉग शुरू कर रहे हैं।"

भारत के दौरे पर दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग, कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर हुए

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा की वैश्विक तनाव के इस दौर में दोनों देश शांति का संदेश देते है।

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Highlights

  • इस यात्रा का उद्देश्य भारत और दक्षिण कोरिया के बीच विशेष रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करना है।
  • दोनों देशों के बीच आज कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर भी हुए है।
  • प्रधानमंत्री मोदी के अनुसार, विकसित भारत 2047 के संकल्प को साकार करने में दक्षिण कोरिया एक अहम भागीदार है।

दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग तीन 19 से 21 अप्रैल तक तीन दिवसीय राजकीय यात्रा पर भारत में है। उनके साथ उनकी पत्नी और दक्षिण कोरिया की फर्स्ट लेडी किम हे-क्युंग भी साथ में आईं हैं। राष्ट्रपति ली के साथ मंत्रियों, वरिष्ठ अधिकारियों तथा बिजनेस लीडर्स का एक उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल आया है। ये राष्ट्रपति ली की भारत की पहली यात्रा है। इस यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के बीच विशेष रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करना है। इसी सिलसिले में प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ली ने आज प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता भी की। दोनों ने नई दिल्ली स्थित हैदराबाद हाउस में महत्वपूर्ण MoUs के आदान-प्रदान को देखा और एक संयुक्त प्रेस मीट में भी भाग लिया।

इस प्रेस मीट में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "लोकतांत्रिक मूल्य, मार्केट इकोनॉमी और कानून के शासन के प्रति सम्मान, ये दोनों ही देशों के DNA में रचे-बसे हैं। हिंद-प्रशांत क्षेत्र को लेकर भी हमारी सोच एक जैसी है। इन सभी बातों के आधार पर, पिछले एक दशक में हमारे संबंध और भी अधिक गतिशील और व्यापक हुए हैं। आज, राष्ट्रपति ली की इस यात्रा के साथ, हम अपनी इस भरोसेमंद साझेदारी को एक फ्यूचरिस्टिक साझेदारी में बदलने जा रहे हैं। हम चिप्स से लेकर जहाजों तक, टैलेंट से लेकर टेक्नोलॉजी तक और पर्यावरण से लेकर ऊर्जा तक हर क्षेत्र में सहयोग के नए अवसर तलाशेंगे और मिलकर दोनों देशों की प्रगति और समृद्धि सुनिश्चित करेंगे।"

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "आज भारत और कोरिया के बीच द्विपक्षीय व्यापार 27 अरब डॉलर तक पहुँच गया है। आज, हमने 2030 तक इसे बढ़ाकर 50 अरब डॉलर तक पहुँचाने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। दोनों देशों के बीच वित्तीय प्रवाह को सुगम बनाने के लिए, हमने 'भारत-कोरिया फाइनेंशियल फोरम' की शुरुआत की है। बिजनेस को-ऑपरेशन को सुदृढ़ करने के लिए, हमने एक 'इंडस्ट्रियल को-ऑपरेशन कमेटी' का गठन किया है। क्रिटिकल टेक्नोलॉजी और सप्लाई चैन के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए, हम इकोनॉमिक सिक्योरिटी डायलॉग शुरू कर रहे हैं। भारत में कोरियाई कंपनियों, विशेष रूप से लघु एवं मध्यम उद्यमों (SMEs) के प्रवेश को सुगम बनाने के लिए, हम कोरियन इंडस्ट्रियल टाउनशिप्स भी स्थापित करेंगे और अगले एक वर्ष के भीतर, हम भारत-कोरिया व्यापार समझौते को भी अपग्रेड करेंगे।"

उन्होंने आगे कहा, "आज, भारत में K-pop और K-dramas बहुत ज्यादा लोकप्रिय हो रहे हैं। इसी तरह, कोरिया में भी भारतीय सिनेमा और संस्कृति को पहचान मिल रही है। हमें खुशी है कि राष्ट्रपति ली भी भारतीय सिनेमा की सराहना करते हैं। इस सांस्कृतिक जुड़ाव को और मजबूत करने के लिए, हम 2028 में भारत-दक्षिण कोरिया फ्रेंडशिप फेस्टिवल का आयोजन करेंगे। हम अगले दशक की सफलता की कहानियों की नींव रख रहे हैं। हम AI, सेमीकंडक्टर और सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में साझेदारी को और गहरा करने के लिए 'भारत-कोरिया डिजिटल ब्रिज' की शुरुआत कर रहे हैं। हम जहाज निर्माण, सस्टेनेबिलिटी, स्टील और पोर्ट्स जैसे क्षेत्रों में MoU पर हस्ताक्षर कर रहे हैं। कल्चरल और क्रिएटिव इंडस्ट्रीज में सहयोग के माध्यम से, हम फिल्म, एनिमेशन और गेमिंग के क्षेत्रों में भी नए कीर्तिमान स्थापित करेंगे।"

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "वैश्विक तनाव के इस दौर में, भारत और कोरिया मिलकर शांति और स्थिरता का संदेश देते हैं। हमें इस बात की बहुत खुशी है कि आज, कोरिया 'इंटरनेशनल सोलर अलायन्स' और 'इंडो-पैसिफिक ओशियंस इनिशिएटिव' में शामिल हो रहा है। हम अपने संयुक्त प्रयासों के माध्यम से एक शांतिपूर्ण, प्रगतिशील और समावेशी हिंद-प्रशांत क्षेत्र की दिशा में योगदान देना जारी रखेंगे। हम इस बात पर भी सहमत हैं कि वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए वैश्विक संस्थाओं में सुधार अत्यंत आवश्यक हैं। लगभग सौ वर्ष पूर्व, भारत के महान कवि गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने कोरिया को पूर्व का दीपक कहा था और आज विकसित भारत 2047 के हमारे संकल्प को साकार करने में कोरिया एक महत्वपूर्ण भागीदार है।"

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